एक्सक्लूसिव

वित्तपोषित विद्यालय का फर्जीवाड़ा : बेगार कराई किसी और से, नौकरी फर्जी डिग्रीधारी को।

सरकारी मान्यता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन किस तरह से युवाओं का शोषण फर्जीवाड़ा करता है, इस खुलासे से यह बात साफ हो जाएगी।

यहां पर एक युवक प्रवीन तिवारी को 3 साल से बिना वेतन के सिर्फ इस आश्वासन के साथ पढ़ाने के लिए कहा गया कि जब सरकार से मान्यता प्राप्त हो जाएगी तो इन्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी। किंतु जब सरकारी नौकरी मिलने की घड़ी आई तो विद्यालय प्रबंधन ने तीन साल से निशुल्क पढ़ा रहे युवक को तो हटा दिया और उसकी जगह अपने चहेते और फर्जी डिग्री धारी व्यक्ति को नियुक्त कर दिया।

बेचारा प्रवीन : बजाए भैंस के आगे बीन

नियम कायदों को तोड़ कर हुई इस नियुक्ति में शिक्षा विभाग के अधिकारी किस तरह से शामिल हैं, आप इस खुलासे में देख सकते हैं।

जनता जूनियर हाई स्कूल बौल्याधार, विकासखंड भिलंगना टिहरी में सन 2006 में सहायक अध्यापक हिंदी भाषा के पद पर एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ था और विज्ञापन के बाद साक्षात्कार हुआ था। जिसमें प्रमोद कुमार जोशी को चयनित दिखाया गया था किंतु उसके बाद अनुमोदन के लिए पत्रावली तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी गई तो बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रमोद प्रसाद के संपूर्ण अभिलेखों और दस्तावेजों की जांच की, जिस में उन्होंने पाया कि प्रमोद प्रसाद का चयन फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर किया गया है तथा प्रमोद प्रसाद पद के सापेक्ष पूर्ण योग्यता नहीं रखते।

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने यह कहकर अनुमोदन नहीं दिया के प्रमोद प्रसाद के पास पद के सापेक्ष B.Ed की डिग्री नहीं थी और शिक्षा अलंकार एक अमान्य डिग्री है, इसलिए अनुमोदन नहीं दिया जा सकता।

उपशिक्षाधिकारी ने भी बताया था गलत

अनुमोदन निरस्त होने के बाद विद्यालय प्रबंधन ने यह भर्ती ही निरस्त कर दी। इसके बाद वर्ष 2011 में विद्यालय की प्रबंधक समिति ने फिर से विज्ञापन की अनुमति मांगी और तत्कालीन मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा विज्ञापन की अनुमति प्रदान की गई। परंतु 2010 में शिक्षक पात्रता परीक्षा को केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य कर दिया गया। अब दोबारा से पेंच फंस गया।

इस बीच पता चला कि प्रमोद प्रसाद शिक्षक पात्रता परीक्षा द्वितीय में उत्तीर्ण नहीं है, इसलिए यह प्रक्रिया भी निरस्त कर दी गई तथा साक्षात्कार नहीं करवाया गया।

पहले प्रबंधन ने भी बताया गलत

वर्ष 2007-08 के बाद वर्ष 2018 तक प्रमोद प्रसाद ने विद्यालय में शिक्षण कार्य नहीं किया तथा राशन की दुकान चलाई।

फिर अचानक 20 फरवरी 2014 को विद्यालय को वित्तीय स्वीकृति मिली और प्रमोद प्रसाद द्वारा पुनः अनुमोदन पत्रावली जिला शिक्षा अधिकारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी पर भेजी गई। प्रमोद प्रसाद को फिर से झटका लगा क्योंकि इस अनुमोदन पर मुख्य शिक्षा अधिकारी नरेंद्र नगर,गढ़वाल ने 23 अगस्त 2016 को विद्यालय के प्रबंधक को कहा कि पुरानी सभी प्रक्रियाओं को निरस्त मान लिया गया है तथा इन पुरानी प्रक्रियाओं के आधार पर अनुमोदन संभव नहीं है।

तीन बार नियुक्ति पाने में प्रमोद प्रसाद असफल रहा तो फिर मुख्य शिक्षा अधिकारी और विधि अधिकारी प्रमोद प्रसाद से मिल गए और उसे विभाग के खिलाफ सेटिंग के तहत कोर्ट जाने को कहा। हाई कोर्ट ने जब अधिकारियों को पूछा तो अधिकारी जानबूझकर चुप रहे।

इस पर हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2017 को मुख्य शिक्षा अधिकारी को आदेश दिया कि उचित निर्णय लिया जाए ! और मुख्य शिक्षा अधिकारी ने फर्जी डिग्री धारक प्रमोद प्रसाद की शैक्षिक योग्यता को छुपा दिया तथा सभी साक्ष्यों को अनदेखा कर दिया और प्रमोद प्रसाद को अनुमोदन दे दिया।

गौरतलब है कि प्रवीन तिवारी को विद्यालय के प्रबंधक और प्रभारी प्रधानाध्यापक ने 2 जुलाई 2015 को सहायक अध्यापक हिंदी भाषा के पद पर शिक्षण हेतु रखा था। इनके पास सभी शैक्षणिक योग्यताएं थी और 3 साल तक विद्यालय प्रबंधन ने इनसे बिना किसी वेतन भुगतान के निरंतर कार्य करवाया।

3 वर्षों तक काम कराने के पर्याप्त साक्ष्यों के बावजूद जब प्रवीन नौकरी से निकाले जाने पर हाईकोर्ट गये तो प्रवीन के वकील ने रहस्यमय में तरीके से याचिका ही वापस ले ली और प्रार्थी को भी नहीं बताया। इस तरह से 3 मई 2018 को प्रमोद प्रसाद को नियुक्ति दे दी गई और बिना वेतन और बिना सूचना के 3 वर्ष पश्चात प्रवीन को बाहर कर दिया गया। अब यह युवक फिर से बेरोजगार है और कभी शिक्षा मंत्री तो कभी अधिकारियों तो कभी एसआईटी के चक्कर काट रहा है।उधर फर्जी डिग्री धारी चहेता प्रमोद ठाठ से नौकरी बजा रहा है।

अहम सवाल यह भी है जब एक बार पहले विद्यालय प्रबंधन भी मान चुका है कि प्रमोद के पास कोई डिग्री नहीं थी तथा सभी अधिकारी अपने पत्रों में यह लिखते हैं कि उसके पास आवश्यक योग्यता नहीं थी तो फिर एक फर्जी डिग्री धारी व्यक्ति कैसे शान से नौकरी कर रहा है और 3 साल तक निशुल्क पढ़ाने वाला प्रवीन कैसे सड़क पर आ गया !

आखिर क्या कोई जिम्मेदार शासन प्रशासन का अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेगा !

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