पर्यटन

पर्यटन: महाराज का महाभारत और बुद्धा सर्किट का सूत्र

कैरावन के माध्यम से महाभारत सर्किट का भ्रमण कर सकेंगे पर्यटक

पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज ने विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से प्रेस वार्ता करते हुए उन्हें हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के प्रमुख बिंदुओं से अवगत कराया. इसके अतिरिक्त उन्होंने महाभारत सर्किट में कैरावान तथा तंबुओं के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने, कैंची धाम मंदिर के प्रचार-प्रसार हेतु एक लघु फिल्म बनाने, अखाड़ा दर्शन यात्रा को शीघ्र आरंभ करने तथा चौरासी कुटिया और जखोल जैसे रमणीक पर्यटक स्थलों को पर्यटकों के बीच प्रचारित करने की योजनाओं के विषय में जानकारी दी।
पर्यटन मंत्री महाभारत सर्किट को लेकर काफी उत्साहित दिखाई दिए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पांडवों तथा कौरवों से संबंधित कई स्थान हैं. उन्होंने कहा कि महाभारत सर्किट के अंतर्गत गढ़वाल के लाखामंडल करण मंदिर दुर्योधन मंदिर भीमगोडा तथा कंडीसोटा से लेकर कुमाऊं के कोटी गांव का क्षेत्र आता है, जिसके विषय में यह मान्यता है कि यहां से माता कुंती स्वर्गारोहण के लिए गईं थीं. उन्होंने कहा कि महाभारत सर्किट के इस विस्तार को देखते हुए पर्यटन विभाग ने ‘कैरावान’ के माध्यम से इसके प्रचार प्रसार की योजना बनाने का निर्णय लिया है. ऐसा होने से उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और राज्य के पर्यटन को देश-विदेश में बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात में उन्होंने नंदा देवी ग्लेशियर के पर्यावरणीय हितों की सुरक्षा के लिए विशेष अनुरोध किया है. उन्होंने जानकारी दी कि सन 1965 में सीआईए की एक पर्वतारोही टीम के द्वारा एक प्लूटोनियम पैक नंदा देवी की चोटी पर लगाया गया था जोकि दुर्भाग्यवश तूफान के आने के कारण वहीं पर रह गया और उसके बाद वह बर्फ के नीचे दब गया. उन्होंने कहा कि रेडियोएक्टिव पदार्थ होने के कारण यह ग्लेशियर के जल को प्रभावित कर रहा हो सकता है इसलिए इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री जी से विशेष अनुरोध किया है, ताकि लोगों को शुद्ध एवं पवित्र गंगाजल प्राप्त हो सके।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि शीघ्र ही उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद द्वारा एक प्रदर्शनी लगाई जाएगी जिसमें साहसिक उपकरणों, राज्य की हस्तशिल्प तथा राज्य के स्थानीय अनाज, फसलों आदि के अतिरिक्त पर्यावरण की सुरक्षा करने वाली रीसाइक्लिंग प्रैक्टिसेज से भी लोगों को अवगत कराया जाएगा ताकि पर्यावरण का संवर्धन करते हुए पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके. उन्होंने कहा कि यह रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।

उन्होंने कहा कि आगामी भविष्य में बुद्धा सर्किट को विकसित करने की पर्यटन विभाग की योजना है. जिसके अंतर्गत कालसी स्थित गोविषाण के व्यापक प्रचार-प्रसार की योजना है. उन्होंने कहा कि कैंची धाम स्थित बाबा नीम करौली के आश्रम के प्रचार प्रसार के लिए शीघ्र ही एक लघु फिल्म का निर्माण करने की पर्यटन विभाग की योजना है. उन्होंने कहा कि यहां पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं और एप्पल और Facebook जैसी बड़ी कंपनियों के सीईओ इस स्थान से जुड़े रहे हैं. ऐसे में इस स्थान को विदेशी पर्यटकों के लिए भी एक आदर्श गंतव्य के रूप में प्रचारित किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त उनके द्वारा दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ की गई मुलाकात के विभिन्न बिंदुओं के बारे में उन्होंने पत्रकारों को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि गुजरात और उत्तराखंड का एक बड़ा ही पुराना रिश्ता है. इस विषय में उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध और उषा के प्रणय मिलन के पश्चात जब वह द्वारिका में पहुंची तो वहां उसने एक मनोहर नृत्य प्रस्तुत किया. जब लोगों ने पूछा तो उसने बताया कि उसने यह नृत्य उत्तराखंड में तब सीखा था जब वह अपनी माता के गर्भ में थी. इसीलिए इस नृत्य का नाम ‘गर्भा’ पड़ा जो कि कालांतर में ‘गरबा’ हो गया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अनेकों रमणीक पर्यटक स्थल हैं जिनमें खतलिंग, पावली कांठा जखोल, सहस्त्रताल देवक्यारा बुग्याल जैसे अनेकों अनजान सौंदर्य पूर्ण स्थान हैं, जहां पर यदि आधारभूत पर्यटक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो यह स्थान देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तथा नए पर्यटक गंतव्यों के विकास की भावना से राज्य सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण पर्यटन उत्थान योजना का आरंभ किया है, जिसके माध्यम से युवा बेरोजगार उद्यमियों को आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है. इस योजना के अंतर्गत 2020 तक 5000 होमस्टे निर्माण का लक्ष्य है. इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए राज्य के विभिन्न स्कूलों तथा कॉलेजों में युवाओं को वर्कशॉप तथा सेमिनार के माध्यम से योजना की जानकारी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से अधिक से अधिक लोग इस योजना से जुड़ेंगे और आने वाले समय में उत्तराखंड के छुपे हुए पर्यटक स्थलों को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा सकेगा।

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