सियासत

एक और ट्रांसपोर्टर चढ़ा जीएसटी और नोटबंदी की भेंट

हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे की आत्महत्या का मुद्दा ठंडा भी नहीं हुआ था कि देहरादून के एक और ट्रांसपोर्टर ने जहर खा लिया। बलवंत भट्ट नाम के इस ट्रांसपोर्टर पर काफी कर्ज हो चुका था। उसका ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय काफी लंबे समय से कर्ज में डूबा हुआ था।

 कर्ज चुकाने के लिए बलवंत भट्ट ने अपना ट्रक में बेच दिया लेकिन कर्ज के शिकंजे से मुक्त नहीं हो पाया। बलवंत भट्ट की पत्नी भी काफी लंबे समय से बीमार थी। घर की माली हालत इतनी खराब थी कि 2 जून की रोटी जुटाने भी मुश्किल हो गई थी।
 मृतक का पोस्टमार्टम कोरोनेशन अस्पताल में किया गया। मृतक के अन्य ट्रांसपोर्टर साथी आपस में चंदा करके घर की माली हालत में कुछ सहयोग करने की व्यवस्था में लगे हुए हैं।
मृतक के परिवार से मिलकर आए कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि राज्य सरकार का कोई भी नुमाइंदा इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। धस्माना कहते हैं कि जीएसटी और नोटबंदी के दुष्परिणाम अब सामने आ रहे हैं।” जीएसटी काउंसिल और सरकार केंद्र सरकार को चाहिए कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए”।
इधर ट्रांसपोर्टर बलवंत भट्ट खुदकुशी के मामले मे मृतक बलवंत की पत्नी की तहरीर पर मुकदमा भी दर्ज हो गया है।
वीरेंद्र नाम के व्यक्ति पर 306 और 504 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोपी वीरेंद्र ने बार बार पैसों की डिमांड की थी।
आरोप है कि कर्ज के दबाव में आकर बलवंत भट्ट ने खुदकुशी की है।पटेलनगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।
एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि कॉल डिटेल के आधार पर जांच जारी है।

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