राजनीति

यूकेडी फिर लेने लगी अंगडाई

 अकेले झंडा थामे मैदान में खड़े हैं ukd के बिष्णु पाल रावत
BJP और कांग्रेस को बताया जालिम पार्टी 
तू चल मैं आता हूं की तर्ज पर राज कर रही है बीजेपी और कांग्रेस -रावत का बयान
शराब  के बल पर चुनाव जीतती हैं बीजेपी और कांग्रेस
 2022 में सत्ता के निकट पंहुचेगी ukd
गिरीश गैरोला
दो धड़ों में बंटी हुई यूकेडी के एका के बाद केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य और उत्तरकाशी जनपद के प्रभारी  विष्णु पाल सिंह रावत ने  पालिका चुनाव  और पंचायत चुनाव  को लेकर पार्टी की  एक बैठक ली।  इससे पूर्व  नगर कार्यकारिणी  के विस्तार  और ब्लाक कार्यकारिणी के गठन पर चर्चा हुई ।
 पूरे देश के लगभग सभी राज्यों की राजनीति में स्थानीय दलों का प्रभाव देखा जा सकता है और  इसी कारण  कहीं न कहीं  वे सत्ता के निकट भी हैं , किंतु उत्तराखंड राज्य के परिप्रेक्ष्य में  राज्य निर्माण के बाद उत्तराखंड क्रांति दल हाशिए पर चला गया जिसका प्रमुख कारण दल में गुटबाजी माना गया।
कई बार एका के प्रयास हुए और फिर टूट गए एक और प्रयास के बाद अब दिवाकर भट्ट को केंद्रीय अध्यक्ष और काशी सिंह ऐरी को संरक्षक पद मिलने के बाद एक बार फिर उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं में राजनीति में फिर से उभरने की  उम्मीद जगने लगी है।
 उत्तरकाशी जनपद की बात करें तो आज भी यूकेडी के नाम पर एक अकेले खंबे के रूप में विष्णु पाल सिंह रावत आज भी मैदान में डटे हुए हैं । उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता  कि उनके साथ कितने लोग  खड़े हैं।
 उन्हें उम्मीद है कि धीरे-धीरे लोग जुड़ते जाएंगे और कारवां  बनता चला जाएगा । सोमवार को काली कमली धर्मशाला में आयोजित बैठक में ठीक समय पर किसी भी कार्यकर्ता के न पहुंचने पर खुद विष्णु पाल सिंह रावत अपने एकाध साथियों के साथ पार्टी का झंडा और बैनर टांगते  हुए दिखाई देते हैं।  पत्रकार वार्ता में विष्णु पाल सिंह रावत ने कहा कि  BJP और कांग्रेस दोनों पार्टियां शराब और धनबल पर वोट खरीदते आए हैं।
 जिस कारण  गरीब और आंदोलन से जन्मा  उत्तराखंड क्रांति दल कभी सत्ता में नहीं रह सका। उन्होंने भरोसा जताया आने वाले 2022 में  तमाम शिकायतों को दूर करते हुए यूकेडी सत्ता के निकट  जरूर पहुंचेगी । कम से कम इस स्थिति में तो जरूर पहुंचेगी कि कोई भी राजनीतिक दल अपनी मनमानी न कर सके। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता भगवान दास मिनान ने स्वीकार किया कि गुटबाजी के चलते उत्तराखंड की जनता से  उत्तराखंड क्रांति दल दूर होता चला गया किंतु पार्टी के सभी गुटों  में अब एका हो गया है और उत्तराखंड क्रांति दल अब अपने बेहतर स्वरुप में है उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मीडिया ने भी उन्हें  अपेक्षित सहयोग नहीं दिया जिसके चलते पार्टी जनता के बीच अपनी बात नही पंहुचा सकी। यही कारण है कि आज उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दे भाजपा और कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र  शामिल नहीं हैं।
फिलहाल पालिका चुनाव और फिर पंचायत चुनाव में उत्तराखंड क्रांति दल उतर कर अपनी पैठ बनाने की कोशिस में है।
 केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य कृष्णपाल सिंह रावत ने कहा कि स्थानीय दल यदि सत्ता में शामिल होता है तो स्थानीय मुद्दे भी सरकार के घोषणा पत्र में शामिल होते हैं। उन्होंने ऊर्जा  प्रदेश उत्तराखंड पर जापान का उदाहरण देकर बताया कि जिस क्षेत्र में बिजली उत्पादन हो रहा है वहां पूरी तरह से बिजली के बिल में छूट और निकटवर्ती इलाकों में 50% छूट दी जानी चाहिए थी ।
 नगर उत्तरकाशी  के संदर्भ में उन्होंने कहा महज 10 मेगावाट से नगर का काम चल सकता है किंतु भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय पार्टियां स्थानीय लोगों के स्थानीय मुद्दे कैबिनेट में नहीं ला सकती।
 जिसके लिए आखिरकार जनता को आंदोलन से उपजी  उत्तराखंड क्रांति दल के बारे में फिर से एक बार पुनर्विचार करना होगा।

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