पर्यटन पहाड़ों की हकीकत

यूक्रेन के सैलानी पिंडारी आए, निराश लौटे

कमल जगाती, नैनीताल
उत्तराखंड के बागेश्वर में प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर के रास्ते का पुल टूटने के कारण विदेशी पर्यटकों के एक दल को जान हथेली में लेकर बिना दर्शनों के ही लौटना पड़ा। दल के सदस्य विश्व में जाने माने इस ग्लेशियर को देखे बगैर लौटने से मायूस हैं।
देखिए वीडियो 

          बागेश्वर जिले के कपकोट में बसा पिंडारी ग्लेशियर देश का जाना माना ट्रैकिंग रुट है जहां हर वर्ष देश-विदेश से हजारों की तादात में सैलानी आते हैं। यह इन पर्यटकों की संख्या काफी अधिक होती अगर सरकार व प्रशासन यहां की सुविधाओं का ध्यान रखती । बदइंतजामी का आलम यह है कि वर्ष 2013 की आपदा में ग्लेशियर को जोड़ने वाला पुल बह गया था जिसे आज तक जोड़ा नहीं गया है। अब यहां आने वाले लोगों को अस्थाई पुल के भी बाह जाने के कारण पिंडारी देखे बिना ही वापस लौटना पड़ रहा है। प्रशासन की इस बेरुखी का शिकार इस बार यूक्रेन से आये सैलानियों के एक दल को बनना पड़ा है। पिंडारी ग्लेशियर को जाने वाले रुट में कई खूबसूरत प्राकृतिक नजारे हैं। जो सैलानियों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं। सुविधाएं नहीं होने से इन हसीन वादियों का दीदार करने आने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2013 में क्षे़त्र में आई आपदा में पिंडर और कफनी नदी में बने द्वाली से पिंडारी को जोड़ने वाला पैदल पुल बह गया था। इसके बाद यहाँ अस्थाई पुल बनाया गया था जो इस आपदा में बह गया है, इस पुल का अब तक पुनःनिर्माण नहीं हो पाया है। पिंडारी का अब समूचे क्षेत्र से संपर्क पूरी तरह से कट गया है। यहां आने वाले सैलानियों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
        सरकार की बद इंतजामी से विदेश से आए सैलानियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। यूक्रेन से 13 लोगों का दल इन दिनों भारत भ्रमण पर आया है। पिंडारी ग्लेशियर का नाम सुनकर सैलानी यहां ट्रैकिंग की मंशा लेकर चले आये। हिमालया टूर आउटडोर एडवेंचर के हिमांशु पांडे को उन्होंने अपना गाइड चुना। जिन्होंने दल को कई हसीन वादियों के बारे में जानकारी दी, लेकिन पिंडारी को जाने वाला रास्ता ठप होने के कारण वहां का दीदार नहीं करा सके।
       दलनायक और हिमालयन योगा यूक्रेन की विदेशी अध्यक्षा सती माता ने बताया कि वह बहुत उम्मीद से पिंडारी दर्शन को आए थे, लेकिन वहां नहीं पहुंच पाने का उन्हें ताउम्र मलाल रहेगा। हालांकि उन्होंने यहां की सुंदरता को नैसर्गिक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और बागेश्वर की वादियां बरबस मन को आकर्षित करने वाली हैं। यहां एक बार आने वाला बारबार आना चाहेगा। उन्होंने अपने पिंडारी रुट की यात्रा के अनुभव को सांझा करते हुए बताया  कि रास्ते में पड़ने वाला पखुवा बुग्याल, पखुआ टाॅप, धाकुड़ी का चिल्ठा मंदिर, खाती, आदि से प्रकृति का लुत्फ उठाया। सुंदरडूंगा व कफनी जाने वाले ट्रैक की भी जानकारी ली।

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