पहाड़ों की हकीकत

दिलचस्प: सालों पहले गांववालों ने बेची जमीन।अब वापसी को धरना।

रोजगार के लिए वर्षो पूर्व सस्ती दरों पर बेची गयी जमीन वापस करने के लिए ग्रामीणों का धरना।

गिरीश गैरोला

उत्तरकाशी गंगोत्री राजमार्ग पर हिमालयन मिनरल वाटर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की उम्मीद से दिल्ली के उधोगपति को को दी गयी जमीन का सद्पयोग न होने और किसी अन्य को जमीन बेचने की सूचना पर गुस्साए ग्रामीणों ने फैक्टरी के गेट पर धरना शुरू कर दिया।

सैंज गाव के ग्रामीणों ने वर्ष 1988-89 में 7500 प्रति नाली की दर से घटाकर उस वक्त 5 हजार रु प्रति नाली के दर से दिल्ली के आनंद प्रकाश श्रीवास्तव को करीब 300 नाली जमीन इस शर्त पर दी थी कि यहाँ मिनरल वाटर का प्लांट लगने के बाद स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। गांव के भानु प्रकाश ने बताया कि करीब 25 स्थानीय निवासियों को रोजगार पर रखा भी गया था किंतु वर्ष 1991 में भूकंप के बाद प्लांट बंद हो गया और धीरे धीरे लोगों को रोजगार से हटा दिया गया।

उक्त जमीन को होटल कारोबारियों को बेचे जाने की भनक लगते ही ग्रामीणों ने फैक्टरी के गेट पर धरना शुरू कर दिया है। ग्रमीणों ने जिला प्रशासन से दिल्ली जे उधोगपति को मौके पर बुलाकर बात करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि जमीन  का उपयोग स्थानीय लोगो को रोजगार देने के लिए होना चाहिए । गाव के ही अरविंद नेगी, रामचंद्र पंवार, परमानंद रतूड़ी और सरोज पंवार ने बताया कि एक सप्ताह तक इंतजार के बाद वे उक्त जमीन से उक्त व्यक्ति को बेदखल कर उस जमीन पर अपनी खेती बाड़ी शुरू कर देंगे और भू  स्वामी को उसी 5 हजार प्रति नाली की दर से भुगतान कर देंगे जो उन्हें दिया गया था।मौके पर पंहुचे प्रभारी तहसीलदार प्रेम सिंह धोनी ने बताया कि प्रथम दृष्टया ग्रामीणों के साथ धोखा हुआ लगता है इसलिए  दोनों पक्षों को कल सुबह 10 बजे वार्ता के लिए बुलाया गया है। जिसमे दोनों तरफ से अपने दावों को पुष्ट करने के दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है ।

वहीं इस मामले में एसडीएम भटवाडी देवेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि तकनीकी रूप से रजिस्टर्ड जमीन का मालिक अपनी भूमि किसी भी व्यक्ति को बेचने के लिए स्वतंत्र है। यदि भूमि की रजिस्ट्री में रोजगार देने का कोई कालम नही होता है यदि उधोगपति ने अलग से भी कोई शर्तनामा दिया है तो उसका निबटारा भी न्यायालय में ही होगा। उन्होंने बताया कि ग्राम समाज की जमीन पर अतिक्रमण की ग्रामीणों की शिकायत पर जांच कर त्वरित कार्यवाही की जाएगी किन्तु भूमिधर को अपनी जमीन बेचने से वे नही रोक सकते है।

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