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राजधानी हुई वीरान

टिहरी रियासत के महाराजा नरेन्द्रशाह की राजधानी के बाद टिहरी-उत्तरकाशी जनपद का जिला मुख्यालय रह चुका नरेंद्रनगर अब वीरान होता दिखाई दे रहा है।

नवीन बडोनी

एक ऐतिहासिक नगर का अपना अस्तित्व विलुप्त होने की कगार पर है। जनता में यह संदेश है कि राजनीति की द्वेष भावना के कारण कुछ माह पूर्व राजनीति में आए सियासी भूचाल से नरेंद्रनगर के विधायक सुबोध उनियाल के कांगे्रस पार्टी से भाजपा में शामिल होने पर विभागों को नरेंद्रनगर से टिहरी भेजा जा रहा हैं। ज्ञात सूत्र से पुष्टि होती है कि टिहरी के विधायक दिनेश धनै के राजनीतिक दबाव में आए हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा इन विभागों को नरेंद्रनगर से टिहरी स्थानांतरित किया जा रहा है।
इस मामले में जब नरेंद्रनगर बचाओ संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल 26 मई 2016 को देहरादून में मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिला तो उनको आश्वासन दिया गया कि कोई भी कार्यालय नरेंद्रनगर से तब तक टिहरी नहीं भेजे जाएंगे, जब तक नरेंद्रनगर की शून्यता को भरने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था अस्थायी तौर पर नहीं की जाती। इसके बावजूद समाज कल्याण विभाग व बाल विकास विभाग को चोरी-छुपे रातों-रात टिहरी स्थानांतरण किया गया। समाज कल्याण विभाग के बंद दरवाजे पर चस्पा नोट में इंगित है कि मुख्य विकास अधिकारी टिहरी गढ़वाल के निर्देशानुसार यह कार्यालय 17 मई 2016 से जिला मुख्यालय से संचालित किया जाएगा, जबकि जिले में इस तरह का आदेश जिलाधिकारी के माध्यम से ही प्रेषित किया जाता है।
इस संबंध में टिहरी के जिलाधिकारी इन्दुधर बौड़ाई का कहना है कि उक्त चस्पा आदेश संज्ञान में नहीं है, परंतु शासन के मौखिक आदेश पर ये कार्यवाही की गयी हैं ।
इस संबंध में संघर्ष समिति ने 10 जून को नरेंद्रनगर के उपजिलाधिकारी कृष्ण कुमार मिश्रा को ज्ञापन दिया कि उक्त मामले में अगर जल्दी इन विभागों को नहीं रोका गया तो उनका यह गांधीवादी आंदोलन आने वाले समय में उग्र रूप ले सकता हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये हैं।
इस संबंध में व्यापार मण्डल के अध्यक्ष दिनेश कर्णवाल का कहना है कि इस तरह से विभाग के जाने के कारण हमारा व्यवसाय काफी प्रभावित हो गया है, जिससे भविष्य में हमारे कई दुकानदारों पर भी रोजी रोटी के संकट पैदा होने की संभावना हैं।
नरेंद्रनगर के इतिहास के संबंध में स्थानीय पत्रकार वाचस्पति रयाल का कहना है कि जहां नरेंद्रनगर को महाराजा नरेंद्रशाह ने वर्ष 1921 से 1949 तक राजधानी बनाया और टिहरी रियासत के उत्तर प्रदेश में विलीनीकरण के बाद वर्ष 1989 तक यह नगर जिला मुख्यालय रहा।
इस संबंध में नरेंद्रनगर के कांग्रेस नगर अध्यक्ष दिनेश उनियाल का कहना है कि मुख्यमंत्री संगठन के बजाय पी.डी.एफ. के दबाव में आकर नरेंद्रनगर को इस तरह की क्षति पहुंचा रहे हंै।
वहीं नगरपालिका नरेंद्रनगर के पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र गुसार्इं का कहना है कि मुख्यमंत्री की इस कार्य प्रणाली से हम आहत हुए हैं। आश्वासन देने के बावजूद भी विभागों को स्थानांतरण किया जा रहा है।
इस संबंध में नगरपालिका अध्यक्ष दुर्गा राणा कहती है कि मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें विभागों की वैकल्पिक व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया। वर्तमान में शिक्षा, जिला उद्योग, पंचायत राज उद्योग, पशुपालन, कृषि विभाग, आयुर्वेदिक, जिला होमगार्ड, ऑडिट विभाग, बाटमाप विभाग, ऊर्जा विभाग नरेन्द्रनगर में स्थित हैं। इन विभागों को स्थानांतरण किये जाने पर नरेंद्रनगर बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय व्यापारियों ने मिलकर इन कार्यालयों को रोकने के लिए एक व्यापक आंदोलन छेड़ दिया है। इसी तरह से अगर विभागों का स्थानांतरण चलता रहा तो एक दिन यह ऐतिहासिक नगर अपनी पहचान खो बैठेगा।

समाज कल्याण विभाग व बाल विकास विभाग को चोरी-छुपे रातों-रात टिहरी स्थानांतरण किया गया। समाज कल्याण विभाग के बंद दरवाजे पर चस्पा नोट में इंगित है कि मुख्य विकास अधिकारी टिहरी गढ़वाल के निर्देशानुसार यह कार्यालय 17 मई 2016 से जिला मुख्यालय से संचालित किया जाएगा

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