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हाफ मैराथन के सफल आयोजन मे ‘रंगोली आंदोलन’ ने भरे रंग !!

   आज सुबह देश विदेश से लगभग 20,000 लोग देहरादून स्थित पुलिस लाईन में आयोजित मैराथन में प्रतिभाग करने के लिए हजारों प्रतियोगी देश-विदेश से इकट्ठे हुए। इस बार हाफ मैराथन की थीम – सड़क सुरक्षा और महिला सुरक्षा रखी गई थी। यह दौड़ 21 किलोमीटर और 7 किलोमीटर की दो श्रेणियों में विभाजित की गई थी। स्कूली बच्चों  सहित  ओपन श्रेणी और मास्टर श्रेणी  के रूप में  धावकों की  तीन श्रेणियां भी  बनाई गई थी  तथा इसमें कुल 1000000 रुपए की धनराशि के पुरस्कार वितरित किए गए। अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के निर्देशन में इस हाफ मैराथन का आयोजन किया गया था।
सभी ने बड़े ही जोश खरोश के साथ इस अभियान में भाग लेकर उसे सफल भी बनाया। परंतु समाज मे जागरूकता लाने के उद्देश्य से आयोजित हुए इस मैराथन की सफलता पर तब पलीता लगता नजर आया, जब वापस मैदान में लौटे प्रतियोगियों ने पूरे मैदान को केले के छिलकों , प्लास्टिक की बोतलों व तमाम अन्य बिस्किट, नमकीन के  रैपरों को जहां-तहां फेंककर मानो उसे पलभर में एक विशाल कूड़ाघर की शक़्ल दे दी । तभी वहां मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता शशि भूषण मैठाणी पारस ने मौजूद लोगों से अपील की कि आप छिलकों या प्लास्टिक की बोतल कवर आदि को बिखेरें नहीं। लेकिन किसी पर कोई असर नही हुआ।
 शशि भूषण बताते हैं कि तभी उनके साथ उनकी बेटी यशस्विनी मैठाणी व मनस्विनी मैठाणी ने कहा कि पापा आज यहां रंगोली आंदोलन करो । बस बच्चों के इतने कहने पर फिर पत्नी तनु श्री व दोनों बेटियों के साथ मिलकर उन्होंने खुद ही पुलिस मैदान में बिखरे कूड़े को समेटना शुरू किया । तभी CO डालनवाला जया बलूनी व कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों की नजर उन चारों पर गई तो वह सबको मुख्य मंच पर ले गई फिर ADG अशोक कुमार ने रंगोली आंदोलन के संस्थापक शशि भूषण मैठाणी को मंच पर आमंत्रित कर जनता से अपील करने का भी आग्रह किया ।
मैठाणी की अपील के बाद मैदान में मौजूद कई लोग रंगोली अभियान से जुड़े और फिर सबने शशि भूषण मैठाणी के रंगोली अभियान में शामिल होकर मैदान की सफाई में योगदान दिया। जिसकी सभी गणमान्यों ने भूरी-भूरी प्रशंसा भी ।
 स्वतन्त्र पत्रकार शशि भूषण मैठाणी पारस द्वारा  समाज में जनजागरूकता के लिए भिन्न भिन्न सामाजिक अभियान चलाए जाते रहे हैं।और उन्ही में से एक है रंगोली आंदोलन । रंगोली आंदोलन एक सामाजिक चेतना की मुहिम है। यह NGO नहीं है बल्कि एक व्यक्ति के रचनात्मक विचार हैं, जिसका नाम ही रंगोली आंदोलन रखा गया है।

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