पहाड़ों की हकीकत

नि:शुल्क पेयजल के जल संस्थान ने की लाखों की ठगी

जगदम्बा कोठारी 

रूद्रप्रयाग। जनपद के जखोली,अगस्तमुनी और ऊखीमठ समेत तीनो ब्लॉकों के दर्जनों गांव मे भारी पेयजल संकट बना हुआ है, जिसके लिए करोड़ों की लागत से स्वीकृत कई पेयजल योजना निर्माणाधीन हैं। कुछ गांवों के पास अपने ही प्राकृतिक पेयजल स्रोत हैं जिनमे ‘स्वजल’ विभाग के माध्यम से ग्रामिणों को पाइप लाइन से निशुल्क और सामूहिक स्टैंड पोस्ट द्वारा पीने का पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है।
लेकिन जनपद के कुछ गांव ऐंसे हैं जहां जल संस्थान द्वारा ग्रामिणों की निशुल्क स्वजल योजना का जबरन अधिग्रहण कर उपभोक्ताओं से मनमाने तरीके से मोटे पानी के बिल वसूले जा रहे हैं, और बिल न जमा करायें जाने के नाम पर कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है। कुछ ऐंसा ही मामला ऊखीमठ तहसील के कोटमा ग्राम पंचायत सहित अन्य गावों से प्रकाश मे आया है।
जनपद के ऊखीमठ तहसील के अंतर्गत पड़ने वाले कोटमा ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम कोटमा, मंजेरा, सोलनू, खोन्नू, कविल्ठा गांवों मे पानी का प्रयाप्त स्रोत को देखते हुए वर्ष 2013 मे स्वजल विभाग द्वारा इन गांवों मे 78 लाख की लागत से पेयजल योजना का निर्माण किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामिणों को निशुल्क और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था।


मई 2018 तक स्वजल द्वारा ग्रामिणों को निशुल्क जलापूर्ती की गयी। ग्रामिणों का आरोप है कि जून माह मे जल संस्थान के कर्मचारी गांवों मे आये और ग्रामिणों से कहा गया कि यह पेयजल योजना अब जल संस्थान के सुपुर्द हो चुकी है और अब प्रत्येक परिवार को 2500 रूपये जमाकर व्यक्तिगत कनेक्शन लेना पड़ेगा, पैंसा नहीं देने वाले परिवार को पानी का कनेक्शन नहीं दिया जायेगा।
इन गांवो के अनुमानित 150 परिवारों ने 2500 रूपये प्रति परिवार के हिसाब से लगभग 375,000 रूपये जल संस्थान को दिये जिसकी उन्हे कोई जमा रसीद नहीं दी गयी।
स्थानीय ग्रामिण दिनेश सत्कारी, सुरेन्द्र सिंह, यशवंत, कुंवर सिंह समेत ग्रामिणों का कहना है कि उक्त कनेक्शन की रसीद जल संस्थान से कई बार मांगने के बाद कुछ दिन पूर्व विभाग ने 2500 की जगह 1785 रूपये की रसीद उपभोग्ताओं को दी और शेष 715 रूपये प्रति परिवार के हिसाब से शेष 107,250 रूपये की ठगी ग्रामिणों से की है जिसका हिसाब विभाग नहीं दे रहा है और अभी कुछ ही कनेक्शन धारियों को रसीद दी गयी है जो विभाग द्वारा ग्रामिणों से की गयी धांधली का बड़ा संकेत है।


अब खुद को ठगा महसूस कर रहे ग्रामिणों ने इस विषय मे आन्दोलन करने का मन बनाया है। स्थानीय ग्रामीण ओम प्रकाश भट्ट का कहना है कि स्वजल से निशुल्क पेयजल के बदले उनके गांव के गरीब परिवारों से लाखों रूपये की जल संस्थान ने ठगी की है, जिसका पुरजोर विरोध किया जायेगा। उन्होंने इस विषय को सोशल मीडिया के माध्यम से भी उठाया है।
वहीं जल संस्थान के अधिशाषी अभियंता संजय सिंह का कहना है कि इस प्रकार ग्रामिणों को ठगे जाने की कोई भी शिकायत उनके पास नहीं आयी है, विभाग की एक जांच टीम बनाकर गांव मे भेजी जायेगी उसके बाद ही इस विषय मे कुछ स्पष्ट कहा जायेगा।
यहां बता दें कि जिन गांवों के आस पास वर्ष भर रहने वाला स्वच्छ और प्रयाप्त जल स्रोत है वहां पीने के पानी की किल्लत दूर करने के लिए स्वजल विभाग द्वारा पेयजल योजना का निर्माण कर निशुल्क व सामूहिक कनेक्शन ग्रामिणों को दिये जाते हैं जिसके रख रखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की ही होती है।

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