राजनीति सियासत

मंत्रिमंडल की दो कुर्सियों पर बढी किचकिच!

डीडीहाट के विधायक और पूर्व मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने खाली पड़ी मंत्री मंडल की कुर्सी ना भरे जाने पर काफी रोष जताया है। मंत्री पद के दावेदार श्री चुफाल ने कहा कि यदि मंत्रीमंडल के पद नहीं बांटने तो साफ मना कर दीजिए। इससे सरकार तथा संगठन दोनों एक बार फिर रक्षात्मक मुद्रा में आ गए हैं।

थराली उपचुनाव में जीत के बाद भाजपा के चार दर्जन विधायकों का सब्र का बांध अब टूटने को है। एक ओर नौकरशाही ने सरकार को अपने चंगुल में जकड़ा हुआ है, वहीं विधायक क्षेत्र में काम को लेकर फडफ़ड़ा रहे हैं। मंत्रिमंडल की खाली कुर्सियों को लेकर भाजपा के दो गुट पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं। इस संदर्भ में एक बैठक देहरादून के एक निजी होटल और दूसरी हल्द्वानी में हो चुकी है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार के लिए मंत्रिमंडल की यह खाली कुर्सियां अब गले की फांस बनने लगी हैं।

बोझ तले दबे सीएम

सवा साल का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद मंत्रिमंडल की दो कुर्सियां खाली हैं। मुख्यमंत्री के पास तकरीबन 40 विभाग हैं। जिन मंत्रियों के पास विभाग दिए गए हैं, वे काम का रोना रो रहे हैं। आयोगों और परिषदों के पद खाली पड़े हैं।

प्रचंड बहुमत के बावजूद  कमजोर निर्णय शक्ति

भाजपा का कार्यकर्ता इसी उलझन में हैं कि सरकार में आत्मविश्वास कब जागेगा।
निकाय चुनाव के दबाव में अभी तक इन तमाम खाली पदों पद सरकार भर्तियां करने से इसलिए बच रही थी कि कहीं निकाय चुनावों में इसका गलत असर न पड़ जाए। रिकार्ड 57 विधायकों वाली प्रचंड बहुमत की सरकार इस उलझन में है कि पिछली सरकार के मंत्री बिशन सिंह चुफाल और बंशीधर भगत को कैसे मनाया जाए ! लगातार चौथी बार के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को कैसे साधा जाए! टिहरी लोकसभा सीट से एक भी विधायक को अभी तक मंत्री नहीं बनाया गया है। यहां कैसे समीकरण साधे जाएं ! ऐसे तमाम उदाहरण त्रिवेंद्र रावत की टेबिल पर हैं कि वो सत्ता का विकेंद्रीकरण करने से डर रहे हैं।

थराली जीतने के बावजूद थरथराहट
यह पहला अवसर है, जब राज्य में इतने लंबे समय से दो-दो मंत्री पद खाली हैं। थराली विधानसभा उपचुनाव की जीत से तीन दिन तक उत्साहित भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर उलझन में हैं कि आखिरकार वो दिन कब आएगा, जब खाली मंत्री पद भरे जाएंगे और दर्जनों कार्यकर्ताओं को विभिन्न दायित्व बांटे जाएंगे।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत अभी तक एकमात्र बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष पद पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आई उषा नेगी को तैनात करने की हिम्मत कर पाए हैं। उषा नेगी की ताजपोशी पर भाजपा के महामंत्री नरेश बंसल सवाल खड़े कर चुके हैं कि लंबे समय से भाजपा के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं की बजाय कम सक्रिय उषा नेगी को तैनाती दी गई।

बेहद जरूरी संवैधानिक आयोगों की कुर्सी भी खाली
हाल ही में महिला आयोग के अध्यक्ष पद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वहां किसी को तैनाती नहीं दी गई। इसी प्रकार उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग, उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग, उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राज्य योजना आयोग, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी भर्ती करने में सरकार की हालत खराब है। विगत पांच वर्षों से प्रदेश में लोकायुक्त जैसा पद खाली है, जो भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टोलरेंस के लिए सबसे बड़ा सवाल है।

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