पहाड़ों की हकीकत

बच्चा जनने के बाद मरणासन्न गाय, पूरा पशुपालन विभाग लापरवाह

पौड़ी गढ़वाल रिखणीखाल के तैडिय़ा गांव के गरीब ग्रामीण बीरेंद्र अपनी गाय की जान बचाने के लिए स्थानीय पशुपालन विभाग के चिकित्सक से पिछले चार दिनों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। हताश होकर उन्होंने गाय को अब भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
दरअसल रिखणीखाल के सीमांत गांव तैडिय़ा में दिक्का देवी व बीरेंद्र की गाय का चार दिन पहले बछड़ा पैदा हुआ, लेकिन दुर्भाग्य से गाय का ग्यार/औंरु नहीं निकल पाया और वह बीमार हो गई। इस पर बीरेंद्र ने पशुपालन विभाग के स्थानीय प्रभारी रिखणीखाल डा. भरत ढौंडियाल से फोन कर अपनी समस्या बताई। उन्होंने डॉक्टर ढौंडियाल से तैडिय़ा गांव आने की गुहार लगाई, किंतु डा. भरत ढौंडियाल कभी पली गांव, कभी वलसा में होने का हवाला दे रहे हैं, लेकिन उनके गांव नहीं आ रहे हैं। हालांकि सूत्र बताते हैं कि वह क्षेत्र में नहीं हैं। इसके अलावा विगत 4 दिनों से शिकायत करने के बावजूद हॉस्पिटल का कोई भी कर्मचारी इस गाय को देखने नहीं आ पाया। एलईओ से संपर्क हुआ तो वह भी विगत 4 दिन से गरीब बीरेंद्र को सरकारी मकडज़ाल में फंसा रहे हंै।
गाय को दर्द से इतनी परेशान है कि वह कभीकभार ही घास खाने की कोशिश कर रही है और गौशाला से बाहर भी नहीं निकल पा रही है।
पीडि़ता दिक्का देवी का कहना है कि उनका गरीब परिवार है, ऐसे में डाक्टर से इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति बीरेंद्र आजकल आग बुझाने के लिए टाइगर रिजर्व पार्क में बतौर पतरोल का काम कर रहा है। इसके अलावा उनके पास आय का कोई साधन नहीं है।
दिक्का-बीरेंद्र तैडिय़ा में अपने दो बच्चों सहित रहते हैं। गांव में वह एकमात्र परिवार रहता है, क्योंकि पांड की पाठशाला बंद होने के कारण उनके बच्चे यहां से कांडा नाला पढऩे जाते हैं। जो 5 किमी. जंगल का रास्ता है। अब देखना भर शेष है कि गाय की जान बचती है कि नही।
मैल नवाड़ रिखणीखाल बिनीता ध्यानी बताती हैं कि क्षेत्र के देवेश ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. सुधीर कुमार सिंह से पौड़ी में बात की तो उनका कहना था कि जब हमारे पास कर्मचारी नहीं हैं तो हम भी क्या कर सकते हैं। रिखणीखाल में पशु चिकित्सालय में 7 पद हैं, जिसमें हर कर्मचारी रोज 85 किमी. दूर कोटद्वार से आना-जाना करता है। कोई भी कर्मचारी क्षेत्र में नहीं रहता। यह आए दिन की घटना है, जब क्षेत्र के किसानों के मवेशी काल के मुंह में समा जाते हैं। विगत 3 दिन में किमगांव में 3 गाय मर चुकी हैं। स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि हमको कोई खबर नहीं है।
इस संबंध में जब इस संवाददाता ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी पौड़ी डा. सुधीर कुमार सिंह से पूछा गया तो उनका कहना था कि मेरे पास भी इसकी शिकायत आ चुकी है और मैं जल्द पीडि़त परिवार तक डॉक्टर पहुंचाने का प्रयास कर रहा हूं। स्थानीय प्रभारी रिखणीखाल डा. भरत ढौंडियाल से जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या बीरेंद्र की गाय को समय रहते उपचार मिल पाएगा या फिर गरीब परिवार भगवान भरोसे रहकर अपने को कोसने को मजबूर होगा।

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