पहाड़ों की हकीकत

नाबालिग को ले भागा नेपाली: कामकाज की निर्भरता बनी समस्या !

पलायन की मार झेल रहे उत्तराखंड के वीरान खेत खलिहान और घरों में सस्ते श्रम की उपलब्धता के चलते प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में पहाड़ों में पांव पसार रहे नेपाल से आने वाले परिवार अब पहाड़ की संस्कृति के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं।

खेत खलिहान से लेकर घर के अंदर तक मजदूरी और घरेलू नौकर के रूप में काम करने वाले नेपाली एक नई तरह की परेशानी खड़ी कर रहे हैं। उत्तरकाशी के सौली गांव में रविवार को दिनेश उर्फ़ डीके पुत्र खड़क बहादुर गांव की ही 16 साल की एक नाबालिग लड़की को ले भागा।

हालांकि उसे तत्काल पुलिस ने चेकिंग के दौरान बड़कोट थाने के पास से गिरफ्तार कर लिया और नाबालिग को भगाने तथा शादी की मंशा से भगाने की धाराएं 363 तथा 366 में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

लड़की के धारा 164 के कलमबंद बयान दर्ज करके उसे घर भेज दिया गया। नाबालिग को भगाने की सूचना मिलते ही अशोक विनोद थपलियाल के नेतृत्व में दरोगा रजनी सिंह, पंकज चौहान, बबीता के साथ ही एसओजी की ओर से औसाफ खान और विजेंद्र सिंह की टीम बनाई गई थी।

थानाध्यक्ष विनोद थपलियाल का कहना है कि इस घटना की सूचना मिलते ही SP उत्तरकाशी तथा DSP बड़कोट के निर्देश पर पुलिस तथा एसओजी लगातार खोजबीन में जुट गई थी। पकड़ा गया युवक बडकोट थाना क्षेत्र के कुपड़ा गांव का रहने वाला है। थानाध्यक्ष विनोद थपलियाल कहते हैं कि क्षेत्र में नेपाली लोग उत्तराखंड के जन- जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। उत्तराखंड के गांव में लोगों की आजीविका तथा तमाम काम धंधे नेपालियों पर निर्भर हैं। वह खेतों में काम करते हैं। घरों में काम करते हैं। घर के अंदर खाना बनाने से लेकर तमाम तरह के कामों में उनकी भागीदारी है। इसके कारण वह भी शारीरिक  जरूरतों के कारण तमाम मर्यादाओं का अतिक्रमण कर रहे हैं। कई परिवार जो काफी लंबे समय से यहीं रह रहे हैं, उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से शादी विवाह आदि भी कर ली है। विनोद थपलियाल कहते हैं कि इस तरह की घटनाएं यहां आम होती जा रही हैं।

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