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एक्सक्लूसिव: सीएम के ओएसडी को बताया भक्त। करंट बाबा ने ‘कब्जाया’ केदारनाथ का शीतकालीन मठ

जगदम्बा कोठारी
रूद्रप्रयाग। छह माह केदारनाथ और छह माह ऊखीमठ मे निवास करने वाले श्री केदार की शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंमकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ मे ठोंके गये 19 नकली ताम्रपत्रों पर पर्वतजन एक ढोंगी बाबा पर बड़ा खुलासा करने जा रहा है।
 प्रदेश के अखबारों मे पिछले कई सप्ताह से प्रमुखता से छायी इस खबर की हकीकत का हम सनसनीखेज खुलासा करने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आप स्वंय हैरान रह जायेंगे कि उत्तराखंड सरकार की शह पर किस प्रकार से हिन्दुओं के पवित्रधाम केदारनाथ पर कुछ लोग कब्जा करने की साजिश रच रहे हैं और करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब जानिए कि किस तरह ऊखीमठ का एक नवयुवक स्वयंभू मठाधीश बनने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए पहले पूरा मामला समझना जरूरी है।
जानते हैं क्या है मामला
3 सितंबर 2019: ओमकारेश्वर मंदिर समिति ऊखीमठ के उपाध्यक्ष अशोक खत्री मंदिर मे पहुंचे ही थे कि अचानक से ऊखीमठ के कुछ स्थानीय युवक अशोक खत्री से मंदिर मे ताम्रपात्र लगे होने की जिद करने लगे। मंदिर समीति के उपाध्यक्ष खत्री ने उन व्यक्तियों की बात का विश्वास नहीं किया लेकिन व्यक्तियों की काफी जिद के बाद खत्री ने उनकी जिद को मानते हुए मंदिर के बंद ताले खुलवाये तो वह भी भौंचक रह गये कि चंडिका मंदिर से लेकर पूरे ऊषा मठ मंदिर मे लोहे की कील से कुल 19 जगहों पर ताम्रपात्र ठोके पाये गये हैं, जिन्हे सदियों से मंदिर मे किसी भी व्यक्ति ने आजतक नहीं देखा, इन ताम्रपात्रों मे हिंदी भाषा मे कुंवर वंश के ‘दीपक कुंवर’ को श्रीकेदार की शीतकालीन गद्दी स्थल का मठाधीश होना लिखा गया। विश्वप्रसिद्द 11वें ज्योतिर्लिंग की शीतकालीन गद्दी स्थल मे अचानक से ताम्रपात्र मिलने की खबर सुनकर केदारघाटी के तीर्थ पुरोहितों,संत समाज, ऊखीमठ ब्लॉक सहित रूद्रप्रयाग जनपद मे हडकंप मंच गया।
4 सितंबर: अगली सुबह मंदिर परिसर मे स्थानीय जनता और तीर्थ पुरोहितों का जमावड़ा लग गया, लेकिन मामले को मीडिया से बचाकर रखा गया।
5 सितंबर: पुन: मंदिर मे स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ लगी और ग्रामीणों सहित मंदिर समीति ने पूरे मंदिर परिसर की पड़ताल के साथ सीसीटीवी फुटेज खंगाली, जिसके अनुसार पाया गया कि मंदिर परिसर की एक दीवार तोड़कर कुछ लोग चंडिका मंदिर,ऊषा-अघनिरूद्द विवाह स्थल  सहित पूरे मंदिर मे गैरकानूनी तरीके से घुसे और मंदिर परिसर मे अपने नाम के ताम्रपात्र ठोक आये।
6सितंबर : मंदिर पर मठाधीश बनने की साजिश को समझते हुए रावल मठ के नीलकंठ भवन के प्रबंधक प्रकाश देशमुख ने 31 अगस्त की सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो पाया कि 31 अगस्त की रात्रि को कुछ लोग दीवार तोड़कर चोरी छिपे मंदिर मे घुसे और रात्री  9 बजकर 10 मिनट के बाद से 2 बजकर 45 मिनट तक सभी कैमरों की वायरिंग निकाली गयी है। इसी बीच इन आठ घन्टों मे मंदिर मे 19 नकलीरजिस्टर मे दर्ज नाम से पाया गया कि 31 अगस्त को ही दीपक कुंवर नाम के व्यक्ति द्वारा चार व्यक्तियों के लिए मंदिर मे कमरा बुक किया गया था और चारों व्यक्ति रातभर कमरे से गायब रहे थे। मंदिर समीति को मामला समझते देरी नहीं लगी और समीति के उपाध्याक्ष अशोक खत्री ने दीपक कुंवर सहित चार व्यक्तियों के खिलाफ ऊखीमठ थाने मे नामजद रिपोर्ट दर्ज करवायी।
इसके बाद केदार घाटी के 200 से अधिक तीर्थ पुरोहितों और बुद्दीजीवियों की आपात बैठक आयोजित की गयी जिसमे निर्णय लिया गया कि ठोके गये ताम्रपात्र नकली हैं और इसमे राजकुंवर वंश के दीपक कुंवर का मठाधीश होना लिखा गया है जो कि सरासर साजिश है। ताम्रपत्र कभी भी हिंदी भाषा मे नहीं लिखे होते हैं और इतिहास मे ओमकारेश्वर मे आजतक किसी भी प्रकार के ताम्रपात्र नहीं मिले है। सभी बुद्धिजीवियों  ने पुलिस से दीपक कुंवर सहित सभी नामजद आरोपियों पर कठोरतम कार्यवाही करने की मांग की।
कौन है दीपक कुंवर
दीपक कुंवर ऊखीमठ ब्लॉक के धवरगिरी मे रहने वाला 25 वर्षीय युवक है जो कि गुप्तकाशी विद्यापीठ से आयुर्वेद का होनहार छात्र रहा है। अपने शातिर दिमाग की उपज के चलते इसने भगवान के नाम पर डराकर कई लोगों मूर्ख बनाया और लाखों रुपये कमाये हैं। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त दीपक कुंवर ने अपने घर मे अष्टभैरव नाम से एक मंदिर स्थापित किया है।इसका दावा है कि ममगाई, बेंजवाल और कुंवर जाति के लोगों के सिवा अगर अन्य जाति के लोग मूर्ति को छूते हैं तो उन्हे करंट का झटका लगता है। आस्था के नाम पर जनता को डराते हुए इसने अष्टभैरव की मूर्ती पर कृत्रिम करंट जोड़कर  सैकड़ों लोगों को करंट के झटके लगाये हैं जिस कारण ऊखीमठ मे यह ‘करंट बाबा’ के नाम से भी प्रसिद्द है।
खरीदी हथौड़ी और कील
31 अगस्त को ही दोपहर मे दीपक कुंवर द्वारा ऊखीमठ के एक हार्डवेयर विक्रेता की दुकान से आधा किलो कील,एक हथौड़ी और पांच किलो चूने का बैग खरीदा गया।
हथौड़ी और कील ताम्रपात्र ठोकने के लिए खरीदे गये और चूने का प्रयोग कीलों पर लगाने के लिए किया गया। चूना लोहे की कील के साथ रासायनिक क्रिया करके जंक पकड़ लेता है। उद्देश्य यह था कि ठोकी गयी कीलें पुरानी नजर आये।
किसका प्राप्त है राजनीतिक संरक्षण
 सीएम के ओएसडी तक को भी दीपक कुंवर अपना अनुयायी बताता हैं। जिसका फायदा दीपक कुंवर अपने निजी हित साधने के लिए उठाता रहा है और अब केदार की शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओमकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ ब्लॉक मे मठाधीश बनने की साजिश रच रहा है।
साजिश के तहत ही इसने मंदिर मे अपने नाम के नकली 19 ताम्रपात्र ठोके हैं जिनमे लिखा गया है कि ‘अष्टभैरव के पुजारी दीपक कुंवर भविष्य मे मठ का मठाधीश’ बनेगा’। मुख्यमंत्री के करीबी लोगों के नाम का संरक्षण बताकर दीपक कुंवर उर्फ करंट बाबा मठाधीश बनने का दुस्साहस कर रहा है।
केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर ने इस पूरे प्रकरण मे प्रदेश सरकार की लापरवाही पर अचरज व्यक्त करते हुए कहा है कि वह अभी दक्षिण भारत मे हैं, केदारनाथ हिन्दुओ की आस्था का केंद्र है और आस्था से खिलवाड़ हिन्दु समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। मामला केदारनाथ से जुड़ा है और वह शीघ्र केंद्र सरकार से मिलकर पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग करेंगे और आरोपी जल्द सलाखों के पीछे होंगे वहीं भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के जिला मंत्री महावीर सिंह बुटोला ने कहा है कि मंदिर समीति द्वारा तमाम सबूत नामजद आरोपियों के खिलाफ दे दिये गये हैं फिर भी इनकी गिरफ्तारी न होना भाजपा की सांठगांठ का नतीजा है इस संबंध मे उन्होने जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग को ज्ञापन भी दिया है लेकिन आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुयी है। यदि शीघ्र आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुयी तो समूची केदार घाटी मे उग्र आंदोलन होगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
बहरहाल ऊखीमठ की स्थानीय जनता ने भी आम बैठक आयोजित कर आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है, उनका कहना है कि ऐसे लोगों को समय रहते दण्डित नहीं किया तो भविष्य मे यह बद्रीनाथ पर भी कब्जा करने की साजिश रच सकते हैं।
जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया है कि पुरातत्व विभाग को ताम्रपत्रों की जांच करवाने हेतु बुलाया है, रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्यवाही होगी।

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