पहाड़ों की हकीकत

वन विभाग और ग्रामीणों ने डकारा बारहसिंगा!

वन विभाग के कर्मचारियों को भी पहुंचाया शिकार भात,  जिस कारण दोषियों के खिलाफ नहीं की जा रही कार्रवाई

जगदम्बा कोठारी
रूद्रप्रयाग। जंगलों में लगी भीषण आग के चलते बीते सोमवार की शाम को ग्रामीणों ने एक संरक्षित प्रजाति के वन्य जीव को बेरहमी से मारकर उसका शिकार कर दिया।
हुआ यह कि आजकल जखोली विकासखंड के उत्तरी- दक्षिणी रेंज के जंगलों मे लगी भीषण आग के चलते आये दिन जंगली जानवर गाँवों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसी कारण कल एक बारहसिंग्गा (स्थानीय भाषा में जडौउ) भटकते हुए ग्राम पंचायत ममणी और बजीरा के खेतों मे स्थानीय ग्रामीणों ने देखा। मांस के शौकीन ग्रामीणों ने बारहसिंग्गा को चारों तरफ से घेर कर उस पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए, पत्थरों की चोट से लहुलुहान यह जानवर अपनी जान बचाने के लिए फिर भी भाग रहा था तो इसी दौरान एक निर्दयी ग्रामीण ने जिंदा बेजुबान पशु के दरांती से उसके पीछे का एक पैर काट दिया। कुछ देर चिखने-चिल्लाने के बाद बारहसिंग्गा ने दम तोड़ दिया। उसके बाद दावत का दौर चला और उसकी “बांट” 500 रुपये प्रति किलो तक ममणी व बजीरा गांव मे बटी। बताया जा रहा है कि जडौउ लगभग 25 से 30 किलो का स्वस्थ नर था।


वन विभाग कार्यालय से लगभग पाँच किलोमीटर दूर पर हुई इस घिनौनी वारदात की खबर जब एक स्थानीय पशु प्रेमी को लगी तो उसने इस खबर को सोशल मीडिया मे वायरल कर दिया।
इससे भी दुखद घटना तो यह है कि वन विभाग को भी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी है लेकिन फिर भी कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हो रही है। कुछ स्थानीय ग्रामीणों व पशु प्रेमियों का आरोप है कि वन विभाग के स्थानीय कर्मचारियों को भी मांस का एक बड़ा हिस्सा गया है जिस कारण विभाग दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता राम रतन पँवार ने विभाग से दोषियों के खिलाफ वन्य जीव अधिनियम व पशु क्रूरता अधिनियम के तहत तुरन्त मुकदमा दर्ज करने की माँग की है। वहीं बजीरा व ममणी के ग्रामीणों सहित वन विभाग भी इस मामले पर कुछ भी कहने से बच रहा है।

Parvatjan Android App

Get Email: Subscribe Parvatjan

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: