पहाड़ों की हकीकत

गांव में शौचालय नहीं, जिला बन गया ओडीएफ!

नीरज उत्तराखण्डी
हाल ही में  जनपद के संवेदनशील युवा जिला अधिकारी  डाक्टर  आशीष चौहान  ने जनपद उत्तरकाशी  के सीमांत गांवों  का एक के बाद  एक ताबड़तोड़  भ्रमण  शुरू कर गांव में  अधिकारियों के  साथ  खुली चौपाल लगाई तो गांव में  सरकारी  योजनाओं की पोल खुलती नजर आई और आखिर अधिकारियों तथा कर्मचारियों की लापरवाही तथा गैर जिम्मेदार हरकत सामने  आ ही गई।
लिवाडी  तथा ओसला गांव में  एक आध  घरों को छोड़ कर अधिकांश घरों में  शौचालय नहीं  है, लेकिन  जिले को शौच मुक्त घोषित कर  पीठ थपथपा कर खुशियाँ मनाई जा रही है। मोरी ब्लाक के  सीमांत गांवों में  शौचालय नहीं बन पाये है। ग्रामीणों ने शौचालय  निर्माण के  लिए  धनराशि  न मिलने  की बात कही। कागजों में  ही शौचालयों  का निर्माण  और भुगतन किया गया और जिले को शौच मुक्त घोषित कर  डुगडुगी बजाई जा रही है। गांव में  पीने को पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है लोग  प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी  भर और ढो रहे है, जबकि शौचालयों में  सारी सुविधाएं दर्शा कर रिपोर्ट भेजी जा चुकी  है, जिसके आधार पर ब्लाक और जनपद को ओडिएफ घोषित किया गया है।
इस संबंध में जब खण्ड विकास अधिकारी डीपी डिमरी से पूछा गया तो उनका  कहना है कि लिवाडी गांव में शौचालय निर्माण के लिए ग्राम विकास अधिकारी तथा ग्राम पंचायत के साथ 110 परिवार के यहाँ शौचालय बनाने  का बांड हुआ था। जिनमें 10 परिवार ने ही शौचालय का निर्माण किया है तथा 100 परिवार के यहाँ  शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है, जिन्हें नोटिस जारी किया गया है। वही ब्लाक के  ढाटमीर, पवाणी, गंगाड तथा ओसला गांव में  शौचालय निर्माण स्वजल ने एक संस्था हैवीटेज इडिया को दिया गया  था।
स्वजल के परियोजना  प्रबंधक का कहना है कि कहना है कि  बेस सर्वे 2012-13 के मोरी ब्लाक में 2536 शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पूरा कर लिया गया है।
हालांकि डीएम के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान सरकार  द्वारा  संचालित  जनकल्याणकारी योजनाएं धरातल पर कितनी उतर पाती है। इसकी सच्चाई खुलकर सामने आ ही गई। स्कूलों से गुरूजी गायब रहते है। अस्पताल से डाक्टर। पेंशन तथा राशन जरूरतमंद तक नहीं  पहुंच पाता। स्वास्थ्य की बदहाल  हालत से ग्रामीण परेशान हैं। गम्भीर बीमारी झेल रही महिलाओं के लिए  तथा पेंशन की राह ताक रहे बुजुर्गों के लिए जिला अधिकारी मसीहा बन कर आये। बुजुर्गों  की पेंशन के मामले  का मौके पर निस्तारण किया गया तथा गम्भीर बीमारी महिला तथा एक बालिका का सरकारी  खर्च  पर इलाज किया गया।
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