दुखद : पांच दिन से हैलीकॉप्टर के इंतजार मे पस्त धारचुला के आपदा पीड़ित

कमल जगाती, नैनीताल उत्तराखण्ड में धारचूला के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आपदा में पुल बहने और सड़कें टूटने के कारण एकमात्र हेलीकॉप्टर का सहारा लेना पड़ रहा है जो नाकाफी है। यहां के लोग हर रोज अपनी बारी का इंतजार करते करते खाली हाथ लौट रहे हैं। देखिए वीडियो  https://youtu.be/24dgF7Jihp0 आपदा प्रभावित […]

कमल जगाती, नैनीताल

उत्तराखण्ड में धारचूला के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आपदा में पुल बहने और सड़कें टूटने के कारण एकमात्र हेलीकॉप्टर का सहारा लेना पड़ रहा है जो नाकाफी है। यहां के लोग हर रोज अपनी बारी का इंतजार करते करते खाली हाथ लौट रहे हैं।

देखिए वीडियो 

https://youtu.be/24dgF7Jihp0

आपदा प्रभावित दृष्टि से संवेदनशील व्यास घाटी के वो लोग जो पूजा पाठ और अपने बच्चे के बढ़ानी (मुंडन संस्कार)के लिए गांव जा रहे हैं वो पिछले 5 दिनों से हेलीपैड से मायूस होकर लौट रहे हैं । ये लोग एकमात्र हेलीकॉप्टर होने के कारण अपनी बारी का इंतजार करते करते थक हार कर लौट रहे हैं । इन दर्जनों लोगों का नंबर नहीं आने की मुख्य वजह एकमात्र हेलीकॉप्टर और समय समय पर उसकी उड़ान में बाधा माना जा रहा है। क्षेत्र के तेज तर्रार युवक शालू दत्ताल ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हमारे संवाददाता को इस समस्या की जानकारी दी।
व्यास घाटी में गुंजी निवासी विनीता गुंज्याल ने बताया कि वो पिछले 3 दिनों से हररोज सुबह 6 बजे अपने एक वर्षीय बच्चे शिवाय के साथ हैलीपेड आ रही है, लेकिन शाम 5 बजे तक उसका नंबर नहीं आ रहा है और उसे मायूस ही घर लौटना पड़ा रहा है । इसके कारण उसे छोटे बच्चे के साथ काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुदि गांव निवासी हेमन्त सिंह का कहना है कि ग्रिफ के सड़क कटिंग के कारण लखनपुर से नजंग तक लगभग 800 मीटर पुराना पैदल मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है । मार्ग के टूटने से सीमांत क्षेत्र के लगभग सात गांव के लोगो को मजबूरन हेलीकॉप्टर से 3100/= रुपये देकर आना जाना पड़ रहा है । उन्होंने ये भी कहा की बुदि गांव जाने में मात्र 500/= रुपये ख़र्च होते हैं जबकी रास्ता खराब होने के बाद उन्हें 3100/= रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं । उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इसके बावजूद तीन दिन तक हेलीकॉप्टर का इंतजार करना पड रहा है और फिर भी हेलीकॉप्टर नहीं मिल रहा है । हेलीपैड पर ही अपनी बारी का इन्तजार कर रहे नाबी गांव के सुरेश नबियाल का कहना है कि यहां हर दिन 100 से अधिक लोग गांव जाने के लिये आ रहे हैं लेकिन एक ही हेलीकॉप्टर होने से कारण मुश्किल से 30 से 40 लोग ही जा रहे हैं । सीमान्त क्षेत्रों से आए सात गांवों के प्रधानों ने दो महीने पहले ही जुलाई, अगस्त और सितम्बर में पूजा पाठ होने का हवाला देते हुए तहसील प्रशासन के माध्यम से सरकार से दो हेलीकॉप्टर की व्यवस्था करने की मांग की थी । लेकिन सरकार ने इस क्षेत्र के लोगों की समस्या पर कोई ध्यान नही दिया है । यहां के लोगों में सरकार की अनदेखी के कारण भी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पैदल मार्ग शीघ्र अति शीघ्र ठीक कर दिया जाए तांकि उन्हे हेलीकॉप्टर में जबरन 3100/= रुपये खर्च करने की जरूरत ना पड़े। धारचूला के रं कल्याण संस्था के अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल और रं यूथ फोरम के अध्यक्ष पूरन ग्वाल ने कहा की सरकार के इस दमनकारी कदम के खिलाफ गांव आने जाने वालों से मनमाफिक किराया लेने के विरोध में शनिवार को लोक निर्माण विभाग के सभागार से तहसील तक जुलूस निकालते हुए ज्ञापन दिया जायेगा।

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