सुचिता को सहयोग और सहारे की दरकार

नीरज उत्तराखण्डी/उत्तरकाशी

क्या सुचिता की गुहार पहुंचेगी सरकार और सरोकारों के द्वार!
आसमान से छूटे और खजूर में अटके कुछ ऐसी ही दास्तां है विधवा सुचिता देवी की।

सुचिता एक विधवा महिला  है, जिसे अपने व तीन मासूम बच्चों के लिए भरपेट भोजन तो दूर रहने को आसरा तक नसीब नहीं हैं।
नौगांव विकास खण्ड के ग्राम भाटिया निवासी सुचिता देवी की कहानी बहुत ही दुखभरी है। दरअसल भाटिया निवासी आनन्द कुमार की दो शादियां थी। पहली पत्नी निर्मला की दूसरे बच्चे को जन्म देने के चार दिन बाद मृत्यु हो गई थी। आनंद कुमार की भी 14 दिसम्बर 2018 को अचानक मृत्यु हो गई। दो सौतेले व एक अपना दो वर्षीय बच्चा सुचिता के भरोसे छूट गए। विधवा सुचिता के पास न तो रहने को आवास है व न ही कृषि भूमि। पति की मौत के बाद कुछ समय गांव वालों ने राशन इक_ा कर सुचिता की मदद की। साथ ही पंचायत चौक में एक लकड़ी का खोखा बनाकर उसे आसरा दिया, लेकिन इस महंगाई के जमाने सुचिता को तीन बच्चों सहित अपना पेट पालना मुश्किल हो रहा है।
सुचिता का कहना है कि फरवरी 2019 में विधवा पेंशन के लिए भी आवेदन किया था, लेकिन अभी तक वह भी नहीं मिली।
नौगांव के सहायक समाज कल्याण अधिकारी सुनील रावत से सुचिता की विधवा पेंशन के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि सुचिता का आवेदन ऑनलाइन हो गया है। शीघ्र ही पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी। बहरहाल भूमिहीन, आवासहीन सुचिता की जिंदगी गुजर बसर करना काफी मुश्किल हो रही है, लेकिन उसे आशा है कि उम्मीद की किरण उस तक पहुंचेगी। उसकी आवाज आवाम तथा जन सरोकारों तक पहुंचेगी और उसके सहयोग, सहायता के लिए हाथ बढेंग़े।

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