शराब ठेके व बार में IP address युक्त CCTV कैमरा की कार्य प्रगति हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं

शराब ठेके व बार में IP address युक्त CCTV कैमरा की कार्य प्रगति हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं

-अवमानना वाद में सरकार द्वारा दाखिल जबाब से याचिका कर्ता संतुष्ट नही:
– हाईकोर्ट ने एक माह के भीतर उपरोक्त कार्य मे रही कमी को पूरा कर पुनः एफिडेविट दाखिल करने के दिये निर्देश

उत्तराखंड में शराबबंदी पर एक जनहित याचिका गरुड़ (बागेश्वर) निवासी हाईकोर्ट में अधिवक्ता डीके जोशी ने पूर्व में दाखिल की थी जिमसें हाईकोर्ट से प्रार्थना की गयी थी कि, प्रदेश में शराब बंदी संबंधी आबकारी अधिनियम 1910 के प्रावधानों को लागू करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाय तथा 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब नही बेचे जाने के संबंधी प्रावधानों का पालन कर इस हेतु प्रभावी नज़र रखने हेतु सभी शराब के ठेके की दुकानों व बार रेस्टॉरेंट में आई पी एडरेस युक्त सी सी टी वी कैमरे लगाए जांय।

29 अगस्त 2019 को उपरोक्त याचिका पर अंतिम फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 6 माह के भीतर मद्यनिषेध नीति बनाने के सख्त निर्देश दिए थे, साथ ही सभी शराब की दुकानों व बार आदि में आई पी एडरेस युक्त सीसीटीवी कैमरा दो माह के भीतर लगाए जाने के आदेश दिए थे, लेकिन समय पर उक्त फैसले का राज्य सरकार के द्वारा पालन नही होने पर डीके जोशी द्वारा जुलाई 2020 में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। जिसमे सचिव आवकारी व आयुक्त आवकारी उत्तराखंड शासन को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है।

कोर्ट से अवमानना नोटिस जारी होने के बाद सरकार पहले सचिव आवकारी द्वारा एफिडेविट दाखिल किया गया था जिस से संतुष्ट न होकर याचिका कर्ता ने प्रति सपथपत्र दाखिल कर कहा था कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन सरकार द्वारा अभी तक नही किया गया है।

न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकल पीठ ने सरकार को पुनः 3 सप्ताह के भीतर सपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया था जिसके अनुपालन में आयुक्त आवकारी द्वारा दाखिल कंप्लायंस एफिडेविट पर आज सुनवाई हुई।

आज याचिकर्ता के द्वारा आपत्ति की गई कि, आयुक्त आवकारी द्वारा दाखिल सपथपत्र से ही खुद साबित हो रहा है कि, प्रदेश शराब ठेके व बार मे IP address युक्त CCTV कैमरा लगाने के कार्य की प्रगति हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप नही हुई। अवमना वाद में सरकार द्वारा दाखिल जबाब से याचिका कर्ता संतुष्ट नही है। आज मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने उपरोक्त कार्य मे सरकार के द्वारा रह रही कमी को पूरा करने हेतु एक माह का समय दिया है साथ ही अनुपालन रिपोर्ट पुनः एफिडेविट दाखिल करने निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई एक माह बाद होगी।

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