हत्या या आत्महत्या : राधिका की मौत मामले में कई अनसुलझे सवाल!

रिपोर्ट : नीरज उत्तराखंडी 

10 जुलाई 2024 त्यूनी।

घटना -4 जून 2024

स्थल – थाना त्यूनी से लगभग 4किमी की दूरी पर टौंस नदी के बाएं छोर पर गांव कूणा के रघुवाड खेड़ा अंतर्गत 

राधिका मौत मामला

हत्या या आत्म हत्या?

अनसुलझे सवाल

घटना स्थल पर मौजूद परिस्थितियां क्यों नहीं दे रही खुद्खुशी की गवाही?

यदि राधिका ने खुदखुशी जैसा आत्मघाती कदम उठाया तो उसकी वजह क्या थी?

जिस पेड़ के नीचे उसका शव मिला यदि उसने उस पेड़ पर फांसी लगा कर आत्म हत्या की है तो फांसी के लिए बनाया गया उसके कुर्ते के फंदे की गांठ ढीली क्यों थी? जैसा की मौके पर मौजूद लोग बता रहे हैं।

शीशम के पेड़ की जिस टहनी पर कुर्ते का फंदा बना कर गांठ लगाई गई उसकी रगड़ से टहनी पर फंदे के निशान क्यों  नहीं है? 

टहनी के बकल  छाल तक सुरक्षित है जो कि फांसी लगने  की दशा में लाश के वजन से फंदे की रगड़ से झड़ जाने चाहिए थे? और गांठ कस जानी चाहिए थी जबकि गांठ ढीली थी? कुर्ते की एक बाजू जमीन पर मिली जबकि उसका एक हिस्सा दूसरी बाजू की गांठ से जुड़ा होना चाहिए था?

 जिस टहनी पर कुर्ता का फंदा लटका था उसके नीचे बड़े बड़े पत्थर है  यदि पत्थर के ऊपर खडे होकर देखे तो फंदा छाती तक पहुंचता है ऐसे में गर्दन  पर फंदा कसने की संभावना नहीं है?

 शव उनके परिजनों ने पेड़ से नहीं उतारा। शव पेड़ के नीचे मिला।

यदि फंदा टूट जाता है तो लाश के पेड़ के नीचे पत्थरों से टकराने पर शरीर पर चोटों के निशान होने चाहिए जबकि लाश पर गले पर गहरी काली धार के सिवा कोई निशान नही थे?

 फांसी लगाए जाने की दशा में शरीर पर जो लक्षण दिखाई देते है जैसे फंदे का घाव चौड़ा होता है  आंखे खुली रहना और जीभ का मुहं से बाहर  होना  मौके पर मौजूद लोग जैसा बता रहे है शव को देखने से  ऐसे लक्षण भी नहीं थे? 

घटना स्थल की परिस्थितियां खुदखुशी करने की गवाही नहीं दे रही है?

घटना स्थल से कुछ दूरी पर राधिका के जूते सलीके से  एक बड़े पत्थरर के ऊपर रखे मिलते है उसके ऊपर एक चैन रखी होती है और एक जूते के अंदर चुम्बक के टुकड़े रखे मिलते है क्या जूते राधिका ने खुद उतारे या प्लानिंग के तहत रखे गये? 

यदि उसे आत्महत्या ही करना चाहती थी  तो नदी में कूद कर भी कर सकती थी उसने फांसी जैसा घात्क विकल्प क्यों चुना?

राधिक की  नानी के अनुसार जब वह घटना स्थल पहुंची शव पेड़ पर नहीं लटका था शव पेड़ के नीचे सोई हुई अवस्था में मिला।

अब सवाल उठता है कि यदि लाश पेड़ के नीचे ऐसी अवस्था में मिलती है जैसे किसी ने सुला रखा हो?तो निश्चत है उसने उस पेड़ पर फांसी नही लगाई  यदि लागाई होती तो फंदा टूटने से नीचे गिरने से लाश में चोटे होती ?  

तो आखिर उसे पेड़ के नीचे किसने रखा ? कहीं ऐसा तो नहीं अपराधी ने गला घोंट कर हत्या कर उसे आत्म हत्या दिखाने का खेल खेला हो ? या खुदखुशी कहीं और जगह की हो?फिर प्रश्न वही की उसे वहां किसने लाया?यदि पेड़ पर ही फांसी लगाई तो लाश को किसने उतारा?

बहरहाल पुलिस  राधिका के पिता जगत सिंह की तहरीर पर राधिका के  सम्पर्क में आने वालों संभावित लोगों एवं उनके  परिजनों से  पुछताछ कर रही है और काॅल की सीडीआर रिपोर्ट का इंतजार कर रही है?

अपराधी चाहे कितना ही शातिर हो आखिर अपराध के निशान छोड़ जाता है अब यह पुलिस की  इच्छाशक्ति कार्यप्रणाली  पर निर्भर करता है कि वह मामले को कितनी गम्भीरता से लेती है और फोन की लोकेशन सीडीआर रिपोर्ट और सख्ती से पूछताछ कर साक्ष्य सबूत व प्रमाण जुड़ाने में कितनी मेहनत करती है? या केवल पीएम रिपोर्ट को एकमात्र आधार मान कर जांच स्थगित कर देती है।

दूसरी  परिजन और क्षेत्र के लोग घटना की जांच और मामले की गुथी सुलझाने के लिए कितने सक्रीय रहते है या मौन साध लेते है  इस पर भी निर्भर करेगा?

या हमेशा की तरह अन्य मामलो की तरह  एक रहस्य बन कर रह जाती है राधिका की मौत ?

बहरहाल पुलिस जांच में जुटी है।

अभी तक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है ?परिजनों को पीएम रिपोर्ट की प्रति भी नहीं दी गई है। मौखिक तौर पर कहा गया है कि पीएम रिपोर्ट में खुदखुशी बताई गई है। राधिका के पिता ने 4 जून को थाना त्यूनी में तहरीर दी थी। 

अभी तक मामले में क्षेत्र के जन सरोकारों, सामाजिक कार्यकत्ताओं जन प्रतिनिधियों  ने भी  घटना पर मौन साधा है कोई प्रतिक्रिया जाहिर  नहीं की है। न ही प्रशासन, शासन पुलिस के उच्च अधिकारियों,  मानव अधिकार आयोग व महिला आयोग ने घटना का  स्वतः संज्ञान लिया है।

वही घटना के संबंध में  सीओ विकासनगर ने बताया कि राधिका मामले में पीएम रिपोर्ट में हैंगिग का खुलासा हुआ है। परिजनों की तहरीर  के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

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