हेल्थ

गर्भवती महिला और नवजात शिशु ने तोड़ा दम

आख़िर कब तक मरती रहेंगी पहाड़ की गर्भवती महिलायें ? स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के लिए कौन है ज़िम्मेदार?

संदीप भट्टकोटी। रुद्रप्रयाग।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते एक और गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई। श्रीनगर बेस अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत से ग़ुस्साए परिजनों ने रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय के डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि रुद्रप्रयाग ज़िला चिकित्सालय की लापरवाही से प्रसूता व बच्चे की मौत हुई है। हालाँकि डॉक्टर इस आरोप को सिरे से ख़ारिज करते हुए महिला की बच्चेदानी फटने को जच्चा-बच्चा की मौत की वजह बता रहे हैं।

आपको याद होगा पिछले वर्ष जुलाई माह में भी एक गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की भी ज़िला चिकित्सालय में मौत हो गई थी। इस मामले में हुई मजिस्ट्रीयल जाँच में चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप सही साबित हुआ था। इसके बाद शासन स्तर पर हुई जाँच का आज तक ख़ुलासा नहीं हुआ।

यह है मामला
रुद्रप्रयाग जनपद के रतूरा गांव निवासी निवासी मनोज कुमार की पत्नी सपना देवी को कल बुधवार सुबह के वक्त प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय ले गए। परिजनों का आरोप है कि महिला सुबह से दर्द से तड़प रही थी, लेकिन डाक्टरों ने उसका उपचार शुरू नहीं किया। जब दर्द अधिक बढ़ने लगा तो जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने उसे बेस चिकित्सालय श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया। महिला को श्रीनगर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसे ऑपरेशन कक्ष में ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने महिला के पेट से मृत बच्चे को बाहर निकाला। महिला के पति मनोज ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की गलती से उसकी पत्नी और बच्चे की मौत हुई है। उसकी पत्नी का यह दूसरा प्रसव था। उसकी बड़ी बेटी 4 साल की है। उधर, बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ केपी सिंह ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बच्चेदानी फटने से महिला की मौत हुई है। जच्चा-बच्चा को बचाने के लिए उनके स्टाफ ने पूरा प्रयास किया था, लेकिन परिजनों ने उन्हें यहां लाने में काफी देर कर दी।

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