पैसे-पैसे को मोहताज मनरेगा कर्मचारी

जगदम्बा कोठारी रूद्रप्रयाग महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्राम पंचायतों के विकास की रीढ़ है। ग्राम पंचायतों में 90 प्रतिशत से अधिक के विकास कार्य इसी योजना के अंतर्गत किये जाते हैं। इन कार्यों के सफल संचालन के लिए मनरेगा अंतर्गत कई पदों पर न्यूनतम मानदेय के आधार पर कई युवा कार्य कर […]

जगदम्बा कोठारी
रूद्रप्रयाग
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्राम पंचायतों के विकास की रीढ़ है। ग्राम पंचायतों में 90 प्रतिशत से अधिक के विकास कार्य इसी योजना के अंतर्गत किये जाते हैं। इन कार्यों के सफल संचालन के लिए मनरेगा अंतर्गत कई पदों पर न्यूनतम मानदेय के आधार पर कई युवा कार्य कर रहें हैं। जनपद रूद्रप्रयाग के तीनों विकासखंड में क्रमशः जखोली 30, अगस्तमुनी 38 व उखीमठ 20 समेत कुल 88 कर्मचारी मनरेगा के अंतर्गत जनपद मे अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। लेकिन वित्तीय वर्ष 2017- 18 के आठ माह बीत जाने के बाद भी अब अभी तक इनको मानदेय नही मिला है। जबकि इसी वित्तीय वर्ष मे विभाग 16 करोड़ 21 लाख रुपये इसी योजना पर खर्च कर चुका है।आर्थिकी संकट के चलते यह मनरेगा कर्मी भुखमरी की कगार पर हैं।
हद तो तब हो गयी कि दिवाली के पर्व पर भी विभाग की तरफ से कोड़ी भर भी इन्हें त्यौहार मनाने को नही मिली। भुखमरी के चलते पिछले 6 अगस्त से यह कर्मी जनपद के तीनों विकासखंडो मे हड़ताल पर हैं। जिस कारण पूरे जनपद की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़े हैं और पिछले कई दिनों से आठ के मानदेय के लिए आंदोलनरत इन कर्मियों की शासन प्रशासन सुध नही ले रहा है। मजबूरन जिला प्रधान संगठन भी इनके समर्थन में आ गया है। प्रधानसंघ के जिला अध्यक्ष धनराज बंगारी कहते हैं कि रविवार व अन्य छुट्टी के दिन भी यह यह कर्मचारी घन्टों विकास कार्यालय में बैठकर प्रधानों के साथ पंचायतों की फाइलों का निस्तारण करतें है लेकिन इनको आठ माह से मानदेय न मिलना विभाग का इनके प्रति सौतेला रवैया दर्शाता है।
मनरेगा कर्मचारी संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार ने विकास विभाग को चेतावनी दी है कि यदि 12 नवम्बर तक सभी मनरेगा कर्मियों का पूरा मानदेय का भुगतान नही दिया जाता है तो 13 नवम्बर को तीनों विकासखंडों के मनरेगा कर्मी जिला विकास कार्यालय पर उग्र प्रदर्शन करेंगे।

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