उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाएं, खासकर वाहनों के नदियों या गहरी खाइयों में गिरने की घटनाएं, काफी आम हैं। राज्य की पहाड़ी सड़कें, तेज मोड़, खराब मौसम और कभी-कभी चालक की लापरवाही के कारण अलकनंदा जैसी नदियों में वाहन गिरने की कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। रुद्रप्रयाग क्षेत्र, जहां हाल ही में रैंतोली के पास बोलेरो कैंपर वाहन अलकनंदा में गिरा, इसी तरह की कई घटनाओं का गवाह रहा है।
कुछ उल्लेखनीय समान घटनाएं इस प्रकार हैं:
– **जून 2025, रुद्रप्रयाग (घोलतिर क्षेत्र)**: चार धाम यात्रा के दौरान एक 31-सीटर बस (या टेम्पो ट्रैवलर) ने नियंत्रण खो दिया और अलकनंदा नदी में जा गिरी। इस हादसे में कम से कम 2-3 लोगों की मौत हुई, 8-9 घायल हुए और 9-10 यात्री लापता हो गए। बस में राजस्थान, गुजरात और अन्य राज्यों के यात्री सवार थे। एसडीआरएफ और पुलिस ने बचाव कार्य किया, लेकिन नदी की तेज धारा के कारण कई शव बहकर दूर मिले।
– **अप्रैल 2025, देवप्रयाग (तेहरी गढ़वाल)**: एक महिंद्रा थार एसयूवी सड़क से फिसलकर लगभग 200-300 मीटर नीचे अलकनंदा नदी में गिर गई। इस घटना में फरीदाबाद के एक परिवार के 4 सदस्यों सहित कुल 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला बच गई और इलाजरत रही। प्रारंभिक जांच में ब्रेक फेलियर या चालक के सो जाने की आशंका जताई गई।
– **जून 2024, रुद्रप्रयाग (रैंतोली के निकट)**: एक टेम्पो ट्रैवलर (26 यात्रियों सहित) ने अंधेरे में नियंत्रण खोया और अलकनंदा नदी में गिर गया। इस हादसे में 14-15 पर्यटक मारे गए और 11-12 घायल हुए। वाहन दिल्ली से चोपता जा रहा था। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए और पीएम मोदी ने मुआवजे की घोषणा की।
ये घटनाएं मुख्य रूप से बद्रीनाथ हाईवे (ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग) पर होती हैं, जहां अलकनंदा नदी बहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में ड्राइवरों की ‘हिल एंडोर्समेंट’ लाइसेंस, ब्रेक चेकिंग और ओवरलोडिंग पर सख्ती की जरूरत है। मानसून के दौरान ऐसी दुर्घटनाएं और बढ़ जाती हैं, क्योंकि बारिश से सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और नदियां उफान पर रहती हैं।
प्रशासन द्वारा राहत कार्य तेजी से किए जाते हैं, लेकिन इन हादसों से साफ है कि सड़क सुरक्षा और जागरूकता पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।



