बागेश्वर के आकाश कुमार ने कठिन मानी जाने वाली यूजीसी नेट परीक्षा में लगातार तीसरी बार सफलता हासिल कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। (NTA) द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित परीक्षा में हिंदी साहित्य विषय से उन्होंने इस बार 96.85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। सीमित संसाधनों के बीच मिली यह सफलता न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि उनके परिवार के संघर्ष की भी प्रेरक कहानी है।
सीमित आय, बड़े सपने
आकाश एक साधारण परिवार से संबंध रखते हैं। उनकी माता लीला देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और उन्होंने सीमित आय में तीन बेटों और एक बेटी का पालन-पोषण किया। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देना परिवार की सबसे बड़ी ताकत रही।
आकाश ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद बागेश्वर स्थित पंडित बी.डी. पांडे परिसर से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बीएड किया और फिर हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री हासिल की। उल्लेखनीय है कि उन्होंने अपने कैंपस में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। यहीं से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने का उनका लक्ष्य स्पष्ट हुआ।
छात्र राजनीति से शैक्षणिक समर्पण तक
एक दौर में छात्र राजनीति से जुड़े रहे आकाश ने समय के साथ अपनी प्राथमिकताएं बदलीं और संपूर्ण ध्यान अध्ययन पर केंद्रित किया। निरंतर तैयारी के बल पर उन्होंने ग्रेजुएशन से लेकर उच्च शिक्षा तक का सफर तय किया।
हालांकि इस बार वे जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) की पात्रता से मात्र छह अंकों से चूक गए, लेकिन तीसरी बार असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी के लिए उनकी योग्यता सुनिश्चित हो चुकी है। यह उपलब्धि उनके परिवार और शिक्षकों के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि वे बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर और अनुशासित रहे हैं।
कुमाऊंनी साहित्य को नई पहचान दिलाने की तैयारी
आकाश का अगला लक्ष्य पीएचडी करना है। वे उत्तराखंड की लोक संस्कृति, विशेषकर कुमाऊं क्षेत्र के साहित्य और काव्य पर शोध करना चाहते हैं, ताकि इस समृद्ध धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल सके। उन्होंने बीएड और डीएलएड भी पूर्ण किया है, जिससे प्राथमिक शिक्षक बनने का अवसर भी उनके पास है, हालांकि फिलहाल उनका फोकस उच्च शिक्षा और शोध कार्य पर केंद्रित है। भविष्य में वे असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना चाहते हैं।
अभ्यर्थियों के लिए संदेश
अपनी उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए आकाश का कहना है कि यूजीसी नेट परीक्षा का स्तर लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। असफलता से निराश होने के बजाय निरंतर अध्ययन और आत्मविश्वास बनाए रखना आवश्यक है। वे स्वयं भी जेआरएफ के लिए पुनः प्रयास करेंगे और साथ ही शोध के माध्यम से उत्तराखंड से जुड़े विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत करेंगे।
आकाश की कहानी यह दर्शाती है कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती, यदि संकल्प अडिग हो और लक्ष्य स्पष्ट।



