आईटीआई के लिए जमीन दान कर भी ठगा सा महसूस कर रहे ग्रामीण

जयहरीखाल प्रखंड की पट्टी तल्ला बदलपुर खैणी गांव में आईटीआई कॉलेज निर्माण कराने के नाम पर एक एनजीओ पर ग्रामीणों को धोखे में रखते हुए 50 नाली जमीन कब्जाने का आरोप लगाया गया है। ऐसे में आईटीआई कॉलेज धोखाधड़ी और मुकदमे की भेंट चढ़ गया और ग्रामीण जमीन दान करने के बाद भी ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

पाठकों को बताते चलें कि पौड़ी गढ़वाल के जयहरीखाल प्रखंड के अंतर्गत पट्टी तल्ला बदरपुर ग्राम खैणी में युगांतर जन परिषद नाम के एनजीओ के अध्यक्ष कैलाश द्विवेदी ने गांव में आईटीआई कॉलेज बनाने का विश्वास दिलाया। उन्होंने ग्रामीणों से मांग की कि यदि उन्हें निशुल्क जमीन उपलब्ध करा दी जाए तो वह ग्रामीण गांव में आईटीआई कॉलेज बनवा देंगे, जिससे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर गांव के कैलाश भारद्वाज सुभाष भारद्वाज सुशील एवं नरेश भारद्वाज ने अपनी बेशकीमती जमीन युगांतर को दिसंबर 2008 में दान कर दी। तत्समय क्षेत्र के विधायक हरक सिंह रावत थे, जिन्होंने वर्ष 2009 में इसका विधिवत शिलान्यास किया।

 ग्रामीणों का आरोप है कि कैलाश द्विवेदी ने दानकर्ताओ को धोखे में रखकर 50 नाली भूमि की रजिस्ट्री करवा ली, लेकिन यह जल्द ही ग्रामीणों के संज्ञान में आ गया और एनजीओ युगांतर की असलियत सामने आने पर एनजीओ ने लिखित में देते हुए कह दिया कि आईटीआई का निर्माण प्रक्रिया शुरू नहीं होने तक भूमि पर मालिकाना हक भूमिधरी का ही रहेगा। इस तरह उनके द्वारा मूल रजिस्ट्री वापस कर दी गई। हालांकि बाद में जैसे ही आईटीआई की निर्माण प्रक्रिया शुरू हुई, वैसे ही मामूली लेन-देन के कारण स्थानीय ग्राम सिलवाड़ निवासी क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रकाश काला ने युगांतर पर मुकदमा दर्ज करवा दिया। मुकदमे के कारण निर्माण कार्य बाधित होने के साथ ही युगांतर केस हार गया। अब असंवैधानिक हथकंडे अपनाते हुए प्रकाश काला जमीन हथियाने की जुगत में लग गए। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि रह चुके इस व्यक्ति के ऐसे व्यवहार से गांव के प्रतिष्ठित परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई। इससे स्वयं को ठगा सा महसूस करते हुए क्षेत्रीय जनता में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों की मांग है कि उक्त भूमि पर शैक्षणिक संस्थान ही बनना चाहिए। इस तरह कैलाश दिवेदी और प्रकाश काला की आपसी लेनदेन के कारण आईटीआई निर्माण मुकदमाबाजी की भेंट चढ़ गया।

 हालांकि युगांतर जन परिषद के उपाध्यक्ष ने भारद्वाज परिवार को एक पत्र प्रेषित किया, जिसमें तर्क देते हुए लिखा गया है कि जनहित में आईटीआई निर्माण के लिए निस्वार्थ भाव से बिना लेनदेन के अपनी बेशकीमती जमीन दान करने के लिए भारद्वाज परिवार का धन्यवाद जताया गया है। साथ ही एनजीओ ने स्पष्ट किया है कि आईटीआई निर्माण हेतु बैंक और सरकार से धन जुटाने के लिए उक्त निशुल्क जमीन को क्रय विक्रय दिखाई गई थी न कि भारद्वाज परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए। एनजीओ ने यह स्पष्ट लिखा है कि मालिकाना हक भारद्वाज परिवार का ही है और रहेगा। उक्त पत्र में यह भी सूचित किया गया है कि युगांतर वर्तमान में परिस्थितियों के कारण, जिसमें ग्रामसभा का असहयोग भी एक कारण था, आईटीआई निर्माण में समर्थ नहीं है, ऐसे में आपको पत्र के साथ रजिस्ट्री वापस की जा रही है। हम दाखिल खारिज की प्रक्रिया उस वक्त करेंगे जब हम निर्माण के लिए सक्षम होंगे। तब तक भूमिका पूर्ण स्वामित्व आपके पास ही रहेगा अतः आपसे अनुरोध है कि आप रजिस्ट्री अपने पास रख लें।
 कुल मिलाकर नौजवानों के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखते हुए खैणी गांव के दानकर्ताओं ने अपनी जमीन इसलिए दान की थी कि उनके गांव के नवयुवकों को अच्छी व तकनीकी शिक्षा उनके गांव में ही मिल सकेगी और वह अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे, लेकिन एनजीओ और एक-दो ग्रामीणों के कारण आईटीआई निर्माण कार्य खटाई में पड़ गया है। अब देखना यह होगा कि गांव में आईटीआई का निर्माण कार्य कब तक शुरू हो पाता है।

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