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अमर उजाला ने छापी दैनिक जागरण के रिपोर्टर की पोस्ट। हो रही फजीहत

जगदम्बा कोठारी , ऋषिकेश

उत्तराखंड का लोकप्रिय अखबार ‘अमर उजाला’ की एक खबर पर दैनिक जागरण के पत्रकार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट दर्ज कर नाराजगी व्यक्त करते हुए कॉपी राइट के अधिकारों का हवाला दिया है। जिसे पढ़कर साफ लगता है कि किस तरह से यह अखबार गैर जिम्मेदाराने तरीके से अपनी कलम चलाता है।
दरअसल बीते शुक्रवार को लोनिवि नरेंद्र नगर ने स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट की सिफारिश के बाद विश्व प्रसिद्द पर्यटक स्थल लक्ष्मण झूला पुल को आवागमन के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया था।

 

90 साल पुराना यह पुल कई पीढ़ियों का साक्षी रहा है। दैनिक जागरण ऋषिकेश के पत्रकार दुर्गा नौटियाल ने कल इसी लक्ष्मण झूला पुल की यादों से जुड़ा एक आर्टीकल ‘मैं लक्ष्मण झूला हूं’ नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब चर्चित रहा और हजारों लोगों द्वारा पढ़ा और शेयर किया गया।

आर्टीकल के अंत मे लेखक ने साफ शब्दों मे अपना परिचय लिखा है ‘@-दुर्गा नौटियाल, दैनिक जागरण ऋषिकेश’। लेकिन आज अमर उजाला ऋषिकेश के अंक मे दैनिक जागरण के पत्रकार का वही लेख “मैं लक्ष्मण झूला हूं” छपा है और छपे लेख के अंत मे अमर उजाला लिखता है कि ‘यह लेख सोशल मीडिया से लिया गया है,लेकिन लेखक के नाम की पुष्टि नहीं हो पा रही है’।


अब जाहिर सी बात है कि लेख के मूल लेखक को यह बात नागवार गुजरेगी ही तो लेखक और पत्रकार दुर्गा नौटियाल ने फेसबुक के माध्यम से अमर उजाला पर तीखी टिप्पणी करते हुए पोस्ट किया है कि

“‘धन्यवाद’ अमर उजाला…
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सोशल मीडिया पर वायरल हुए मेरे एक आर्टिकल ‘मैं लक्ष्मण झूला सेतु हूं’ की गंभीरता को आपने समझा और उसे अखबार में स्थान दिया। मगर, हैरानी इस बात की है कि आपने भी वही काम किया जो कल कुछ ‘टटपुंजे’ कॉपी पेस्ट करने वाले ‘फेसबुकिया लेखकों’ ने किया। कुछ चंद लोगों ने कल इस रचना को अपना नाम जोड़कर आगे बढ़ा दिया, जिन्हें मैंने व मेरे शुभचिंतकों ने खूब गरियाया और बेइज्जत किया। फिर उन्होंने अपनी नीच हरकत को सुधार दिया।
अमर उजाला, तुम तो खूब जानते हो बौद्धिक संपदा का कॉपीराइट होता है। जिसके तहत इस रचना के सर्वाधिकार भी मेरे पास सुरक्षित हैं। इन दिनों प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में वायरल सच की पड़ताल का भी खासा चलन है। होना भी चाहिए। लेकिन अमर उजाला, तुम ऋषिकेश जैसे एक छोटे से शहर में इस रचना के मूल लेखक को नहीं ढूंढ पाये, यह तुम्हारे लिए शर्म की बात है।
बहरहाल मैं ‘मैं लक्ष्मण झूला सेतु हूं’ आत्मकथा का दूसरा भाग लिखने की घोषणा भी कर चुका हूं। और तुमने मेरी इच्छा को और भी प्रबल कर दिया। अब भी तुम्हें इस रचना का लेखक न मिले तो चुल्लू भर पानी में डूब मरो…।”

अब अमर उजाला पर सवाल उठता है कि हजारों लोगों ने इस पोस्ट को पढ़ा और शेयर किया लेकिन अमर उजाला कल अपने ही शहर के पत्रकार की फेसबुक पोस्ट का पता नहीं कर सका और उन्होने अखबार मे आर्टीकल के अंत मे छाप दिया कि यह लेख सोशल मीडिया से लिया गया है और लेखक के नाम की पुष्टि नहीं हो पा रही है।
अब जब लेखक के नाम की पुष्टि हुई तो अमर उजाला को पता चला कि यह तो अपने ही शहर के दैनिक जागरण के स्थानीय पत्रकार की पोस्ट है तो अब सोशल मीडिया पर अमर उजाला की जमकर आलोचना हो रही है जिससे नम्बर वन होने का दावा कर रहा यह अखबार अपनी फजीहत झेल रहा है।

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