पंचायत एक और एक्ट दो, कब तक नीद से जागोगे सरकार ये तो गज़ब का झोल है

रिपोर्ट- राजकुमार सिंह 

चलिए हम अपने जिला पंचायत अध्यक्ष से अच्छे जनरल नॉलेज की उम्मीद नहीं करते क्यूँकि उन्हें ढेरों संवैधानिक निर्णय लेने होते हैं और ऐसे निर्णयों में तथ्यों से बहुत परिचित ना होना सामान्य है।

आपके लिए इन मुद्दों का कोई महत्व भी नही होना चाहिए क्यूँकि आप जैसे लोगों के कार्य और उनकी संवैधानिक संरचना को देख/पढ़ के ही ग्रेनविल ऑस्टिन ने लिखा है- भारत का संवैधानिक प्रमुख एक रबर स्टैम्प मात्र है, उसकी वास्तविक और विवेकाधिकार शक्तियां केवल संविधान में वर्णित हैं उसके वरण योग्य नहीं ।

लेकिन ठहरिये …!!

आप इस जनपद के प्रथम नागरिक हैं और अपने संवैधानिक पद को अशोभित कर रहे हैं, तो शौक़ से कीजिए किंतु अपनी इस ‘अतिकुशाग्र बुद्धि के लपेटे में जिला पंचायत मे जनता द्वारा निर्वाचित सदस्यों को और जिला पंचायत के कुशल प्रशासकों को ना लीजिए। धन्यवाद रहेगा आपको।

पिछले 15 जून से लगातार जिला पंचायत परिसर में आंदोलनरत जिला पंचायत सदस्यों का आंदोलन हर रोज एक नए मोड पर आकर नए आरोप लगाता नजर आ रहा है। जिला पंचायत सदस्यों द्वारा जिपं अध्यक्ष पर सदस्यों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि, जिला पंचायत अध्यक्ष लोकतंत्र की हत्या करा रही हैं। उन्होने कहा कि, अध्यक्ष पंचायत द्वारा एक्ट की अपने स्तर से ब्याख्या करना तानाशाही है। आंदोलनकारी सदस्यों ने शीघ्र समाधान नही होने पर उग्र आन्दोलन की चेतावनी दी है।

गौरतलब है कि, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा उत्तरप्रदेश व उत्तराखण्ड को मिलाकर 07 अप्रैल 2016 मे “उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम,2016” प्रकाशित किया गया। जिसका उद्देश्य एक राज्य, एक नियम था। किन्तु वागेश्वर जनपद निर्माण के बाद 01 अप्रैल 1998 को अस्तित्व मे आई जिलापंचायत ने अब तक 6 निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष दिये हैं। सभी पाँच जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बगैर किसी धरने के शांतिपूर्ण तरीके से चला है। वागेश्वर के जिला पंचायत इतिहास मे धरने कि यह पहली घटना है जहां पर अपने ही सदन के खिलाफ जिला पंचायत उपाध्यक्ष समेत सभी विपक्षीय सदस्य धरने पर हैं।

आपको बताते चले कि, वागेश्वर जिला पंचायत परिसर में आंदोलनरत सदस्यों से वार्ता को पहुँची जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव की वार्ता बेहद चर्चा का विषय बनी हुई है। जिसे लेकर पूरे प्रदेश कि राजनीतिक चर्चें जोरों पर हैं।

जहां आंदोलनरत सदस्यों ने शासन से प्राप्त बजट सभी 19 जिपं क्षेत्रों में बांटने का लिखित आश्वासन देने की मांग पर अड़े रहे, लेकिन जिपं अध्यक्ष बसंती देव ने कहा कि वही बात मानी जायेगी जो एक्ट मे लिखा हो पर मामला तब से और अधिक बिगड़ गया जब ज़िप अध्यक्ष के द्वारा लाया गया एक्ट जिपं कार्यालय के एक्ट से भिन्न निकला।

जिला पंचायत मे निर्वाचन के बाद निर्वाचित सभी सदस्यों को तत्कालिक अपर मुख्य अधिकारी द्वारा प्रथम सामान्य बैठक मे यह एक्ट जानकारी हेतु दिया गया था। यह वही एक्ट है जो ukpanchayat.org प्रदेश के पंचायतीराज विभाग कि आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। जिले के डीपीआरओ कार्यालय से भी यही एक्ट जानकारी मागने पर उपलब्ध कराया गया है। जो सभी 19 जिला पंचायत के सदस्यों को प्रथम बैठक के दौरान दिया गया था। परन्तु उपजिलाधिकारी योगेंद्र सिंह, तहसीलदार नवाजिश ख़लिक़,नायब तहसीलदार दीपिका आर्या अभियंता एस पी कोठियाल को साथ लेकर आंदोलनरत सदस्यों से वार्ता के लिए उनके सम्मुख पहुची जिला पंचायत अध्यक्षा अपने साथ लाई गई नई पंचायत नियमावली मे समिति के कार्यकाल को दो वर्ष का बताकर नियमसंगत करार दे दिया गया। उनके द्वारा लाई गई एक्ट की किताब पर समितियों का कार्यकाल दो वर्ष स्पष्ट दर्ज था, जबकि सदस्यों को दी गई किताब मे यह सदन के अंदर निरधार्ण की बात अंकित थी। अध्यक्ष ने बताया कि “यह नया एक्ट है जो उन्हें पंचायती राज विभाग से मिला है। जो पूर्ण रूप से ठीक है, सदन के सभी कार्य इन्ही नियमों के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं।“

जबकि दिनांक 02/12/2019 को जिला पंचायत की प्रथम सामान्य बैठक की कार्यवाही रजिस्टर मे अपर मुख्य अधिकारी द्वारा सदन को अवगत कराया गया है कि उत्तराखण्ड अधिनियम 2016 मे स्पष्ट नहीं है। जिस कारण वर्तमान में जिला पंचायतों में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित अधिनियम 1961 नियम के अन्तर्गत ही कार्यों का सम्पादन किया जा रहा है। सदस्यों का कहना है कि उस पर दर्ज नियमों के अनुरूप कोई कार्य नहीं किया गया है। समितियों के आरक्षण पर भी वागेश्वर जिला पंचायत मे कोई नियम अमल में नहीं लाया गया है।

आन्दोलन पर बैठे सदस्यों ने इस नई नियमावली पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया। अध्यक्ष अपने साथ लाई एक्ट और सदस्यो को दिए गए एक्ट दोनो मे समितियों के कार्यकाल को लेकर दी गयी बाते अलग अलग निकली। धरने मे बैठे सदस्यो ने एक्ट के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया। उन्होंने प्रशासन से जिला पंचायत के एक्ट को सीज करने को कहा।

उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के द्वारा दिए गए एक्ट को गलत बताया और सदस्यो को भ्रमित करने की बात कही। मध्यस्थता कराने को बैठे उपजिलाधिकारी व उनकी टीम द्वारा इतने विरोध के बाद भी बिना किसी जांच पड़ताल के इस एक्ट को पढ़ने की अनुमति दे दी, जो सदस्यों को भ्रमित करने के अलावा कुछ और साबित नहीं हुआ। धरने मे बैठे जिपं सदस्यों ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पंचायत एक्ट की गलत जानकारी उपलब्ध कराकर सदस्यों को गुमराह कर रही है इसलिए उन पर कार्यवाही की जानी चाहिए। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य हरीश ऐठानी, सुरेंद्र सिंह खेतवाल, रूपा कोरंगा, इंदिरा परिहार, वंदना ऐठानी, गोपा धपोला, पूजा आर्या, रेखा देवी सहित उपजिलाधिकारी योगेंद्र सिंह, तहसीलदार नवाजिश ख़लिक़,नायब तहसीलदार दीपिका आर्या अभियंता एस पी कोठियाल, लेखाधिकारी गोविंद भौर्याल आदि मौजूद थे।

मैंने आज तक कभी जिला पंचायत का एक्ट पढ़ा भी नहीं – डीपीआरओ बागेश्वर

डीपीआरओ बागेश्वर बसन्त मेहता से जब हमारे बागेश्वर संवाददाता राजकुमार सिंह परिहार ने जानकारी के लिए मोबाईल मे सम्पर्क किया तो वह इन सब से पहले तो बचते नजर आए और इस पर किसी तरह की कोई जानकारी न होने व एक्ट देखना पड़ेगा की बात करते रहे।

उन्होने कहा कि, पहले तो जिला पंचायत का एक्ट मुझे ढ़ूडना पड़ेगा। पहले पता करना पड़ेगा यह मुझे मिलेगा कहाँ। जिला पंचायत के बारे में कुछ भी नहीं जानता हूँ क्योकि मैंने आज तक कभी जिला पंचायत का एक्ट पढ़ा भी नहीं है इसलिए मैं कोई जानकारी आपको नहीं दे सकता हूँ। आप देहरादून मे कोई त्रपाठी जी उनको कॉल कीजिये उनको पूरी जानकारी होती है, वो आपको बता पायेंगे। अब

आप ही बताइये इस प्रकार के जवाब देने वाले सम्मानित पदो पर बैठे सम्मानित अधिकारियों के बारे में आप क्या कहेंगे ? सत्ता का दबाव या पद का अहम !

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