संविदा नर्सिंग कर्मचारियों के साथ सोतेला व्यवहार कर रही सरकार।

आज 22 सितंबर 2021 को संविदा एवं बेरोजगार स्टाफ नर्स महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष हरीकृष्ण बिजल्वाण द्वारा कल जारी हुए पत्र जो कि शासन द्वारा महानिदेशक को प्रेषित है, जिसमें स्टाफ नर्सेज भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद से न करा कर उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड से संपादित करने को कहा गया है।

इसका हमारा संगठन पुरजोर विरोध करता है कि एक तरफ माननीय मुख्यमंत्री जी माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी हमें आश्वासन देते हैं कि संविदा नर्सेज के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा। भर्ती प्रक्रिया में उनको वरीयता देते हुए भर्ती प्रक्रिया वर्ष वार वरिष्ठता के माध्यम से कराई जाएगी ।किंतु हमारी अफसरशाही हमारी सरकारों पर हावी रही है ।

इसी क्रम में कोई भी अफसर माननीय स्वास्थ्य मंत्री और माननीय मुख्यमंत्री की बातों पर ध्यान ना दे कर केवल अपने निजी स्वार्थ के लिए गलत फैसले लिए जा रहे हैं। जिससे प्रदेश के युवाओं को निराशा हाथ लग रही है।

जिसका परिणाम आगामी चुनाव में सरकार को नकारात्मक मिल सकता है। हमारे संगठन की माननीय मुख्यमंत्री जी से प्रार्थना है कि भर्ती को तुरंत गतिमान करते हुए भर्ती प्रक्रिया वर्षवार करने की कृपा करें क्योंकि संविदा नर्सेज ने हर सुख दुख में राज्य सरकार का दुर्गम अति दुर्गम में हर वक्त साथ दिया है।

आज भी पूरे प्रदेश में कोविड-19 वैक्सीन का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। हमारे सभी कर्मचारी सुबह 8:00 बजे शाम 6:00 बजे तक लगातार काम कर रहे हैं।

इसी प्रकार पिछले 2 साल से कोविड मरीजो की देख भाल में  बिना स्वार्थ भाव के रात दिन 24 * 7 बिना अवकाश के ड्यूटी कर रहे हैं किंतु सरकार इन सब को दरकिनार करते हुए अनुभवहीन नए लोगों को आगे ला रही है।

क्या वह अनुभवहीन लोग जिनको पीपी किट पहनना नहीं आता जिनको अभी सही तरीके से सुई पकड़ना नहीं आती क्या वह इस तरह की महामारी में काम कर पाएंगे।

यह एक सोचनीय विषय है बड़े अफसर और बड़े नेता अपने इलाज करवाने के लिए दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाते रहे हैं  तो हमारे पहाड की जनता इस प्रकार अनुभवहीन लोगों से इलाज करा कर अपनी जान माल की  रक्षा करेगी।

इसका जवाब हम अपनी सरकार से चाहते हैं कि वह क्यों अनुभव वाले लोगों को पीछे कर अनुभवहीन को वरियता दे रही है ।हम पुनः सरकार से इस भर्ती को वर्षवार कराने की मांग करते हैं नहीं तो हम लोग सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे और स्वास्थ्य विभाग के सभी सभी कार्यक्रम  विफल हो जाएंगे इसके सारी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की  होगी।

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