खुलासा : पीडब्ल्यूडी के बाबू ने किया 30 लाख का गबन।बाबू के खिलाफ पुलिस में तहरीर।फंस सकते बड़े मगरमच्छ

अनुज नेगी

पौड़ी।लोक निर्माण विभाग में एक घोटाला सामने आया है। लैंसडाउन खंड में तैनात रहे बाबू ने करीब 30 लाख का गबन का गबन कर दिया, मगर जिम्मेदार प्रशासन कुम्भकर्ण की नींद सोता रहा। 

गबन के चार वर्ष बाद वर्तमान अधिशासी अभियंता द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी को इसकी तहरीर दी गई है।

मामला प्रांतीय खण्ड, लोक निर्माण विभाग लैंसडाउन का है। जहाँ कनिष्ठ सहायक श्री प्रमेन्द्र सिंह पुत्र स्व लक्षमण सिंह द्वारा तीस लाख का गबन कर दिया गया,मगर जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों को जरा भी इसकी भनक तक नही लगी।

बतादें कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता स्व प्रवीन बहुखंडी ने 2018 से 22 अक्टूबर 2020 में कनिष्ठ सहायक प्रमेन्द्र सिंह पुत्र स्व लक्षण सिंह को ऑन लाइन देयकों की फीडिंग एवं डिपोजिट से संबधी कार्य दिया,जिसमे कनिष्ठ सहायक प्रमेन्द्र सिंह ने विभाग के कुछ ठेकेदारों का 10 प्रतिशत धरोहर धनराशि जो कि लगभग 30 लाख रुपये अपनी पत्नी व रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर किये गए। 

इस गबन में मुख्य रोल तत्कालीन अधिशासी अभियंता और तत्कालीन अकाउंट का अहम रोल माना जा रहा है।अगर उस वक्त अधिशासी अभियंता और तत्कालीन अकाउंट का ट्रांसफर नही होता तो यह गबन अभी तक करोड़ो में हो जाता।

वहीं लाखों के गबन का खुलासा तब हुआ जब ठेकेदारों का दस प्रतिशत धरोहर धनराशि का भुगतान नही हुआ तो ठेकेदारों ने इसकी शिकायत तत्कालीन प्रभारी अधिशासी अभियंता विवेक सेमवाल को दी, मगर एक्शन साहब इस बाबू पर विभाग की ओर से किसी भी तरह का एक्शन नही ले पाए,आखिर विभाग का सवाल जो था।

वही जब वर्तमान अधिशासी अभियंता प्रेम सिंह बिष्ट को इसकी शिकायत मिली तो एक्शन सहाब ने तुरन्त इसकी शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी को दी इस पर अभी जांच चल रही है। 

अब बड़ा सवाल है जब तत्कालीन प्रभारी अधिशासी अभियंता विवेक सेमवाल को इसकी शिकायत मिली तो एक्शन साहब इस भृष्ट बाबू को क्यों बचाते रहे,क्यों इस भृष्ट बाबू को निलंबित नही किया गया ओर इसकी शिकायत पुलिस को क्यों नही दी गई,लगता है सेमवाल जी को पता था मगरमच्छ जाल में फस सकते थे।

वही जब वर्तमान अधिशासी अभियंता प्रेम सिंह बिष्ट से हमने बात की तो उन्होंने कहा कि ये बाबू लंबे समय से अवकाश पर चल रहे है और हमने इनका वेतन रोक दिया है और गबन की शिकायत पुलिस को दी गई है।

वही जब पर्वतजन ने गबन के आरोपी बाबू प्रमेन्द्र सिंह का पक्ष जानने पहुंचा तो बाबू ने खुद ही स्वीकार किया है कि मेरे द्वारा 31 लाख का गबन किया गया ओर गबन की धनराशि मेरे द्वारा ठेकेदारों को वापस भी कर दी गई,ओर मेरे इस लाखों के गबन में मेरे साथ तत्कालीन अधिशासी अभियंता, तत्कालीन अकाउंट ओर कई अधिकारियों का अहम रोल है क्योंकि इन भुगतानो में मेरे एक भी हस्ताक्षर नही है,ओर अगर इसकी गहराई से जांच होती है तो इसमें बहुत अधिकारी भी फस सकते है।

वही बाबू प्रमेन्द्र सिंह ने वर्तमान अधिशासी अभियंता प्रेम सिंह बिष्ट पर मानसिक प्रताडित का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मुझे अधीक्षण अभियंता पौड़ी द्वारा क्लीन चिट मिल गई है तो वो मुझे मानसिक प्रताडित कर मुझे कार्यलय में मेरी हाजरी नही लगाने देते और मेरा 23 माह का वेतन रोक कर अब मुझे वर्तमान में जोइन करने को मजबूर कर रहे है,ओर 23 माह का वेतन काटने को कह रहे है। जिसके कारण मेरा परिवार सड़क पर आने को अब मजबूर हो रहा हैं।

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