देहरादून:
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में फरवरी माह के दौरान हत्या की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. इन घटनाओं में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा तिब्बती मार्केट के पास हुए गैस एजेंसी मालिक अर्जुन शर्मा का हत्याकांड. इस मामले ने मां-बेटे के रिश्ते की पवित्रता को लेकर पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी थी. अब इस सनसनीखेज केस में एक भावनात्मक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है.
आरोपी मां बीना शर्मा ने अपने बेटे के अंतिम संस्कार से जुड़े कर्मकांड में शामिल होने के लिए अदालत में अपील दायर की. यह वही मां हैं, जिन पर अपने ही बेटे की हत्या की साजिश रचने का आरोप है.
क्या है पूरा मामला?
11 फरवरी को देहरादून के तिब्बती मार्केट के पास हमलावरों ने गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी थी. शुरुआत में इसे सामान्य आपराधिक वारदात माना गया, लेकिन पुलिस जांच में जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, मामला बेहद चौंकाने वाला निकला.
जांच में संदेह की सुई अर्जुन की मां बीना शर्मा की ओर घूमी. अर्जुन के पिता एक सेवानिवृत्त अधिकारी बताए जाते हैं. परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था और गैस एजेंसी के साथ संपत्ति का व्यवसाय भी करता था. बाहरी तौर पर सुसंस्कृत और सम्मानित दिखने वाले इस परिवार के भीतर संपत्ति और पैसों को लेकर तनाव पनप रहा था.
पुलिस जांच में सामने आया कि आर्थिक हित और संपत्ति विवाद ने भयावह रूप ले लिया. आरोप है कि बीना शर्मा ने किराए के शूटरों के जरिए इस वारदात को अंजाम दिलाया.
पुलिस का बड़ा खुलासा
तत्कालीन देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने बताया था कि तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी गईं. पुलिस के अनुसार हत्या पूर्व नियोजित थी और वारदात को अंजाम देने के लिए बाहरी लोगों की मदद ली गई. मामले में ठोस सबूत जुटाए जाने की बात भी अधिकारियों ने कही थी.
इस हत्याकांड में आरोपी मां बीना शर्मा, उनके मित्र विनोद उनियाल, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष अजय खन्ना, शूटर पंकज राणा और राजीव उर्फ राजू को गिरफ्तार किया गया है.
अदालत में भावनात्मक दृश्य
18 फरवरी को अदालत में पेशी के दौरान बीना शर्मा ने हाईकोर्ट से अपील की कि चाहे उन पर कितने भी आरोप हों, लेकिन वह एक मां हैं और अपने बेटे के अंतिम संस्कार के बाद होने वाले कर्मकांड में शामिल होना चाहती हैं.
यह दृश्य अपने आप में विडंबनापूर्ण था—जिस पर बेटे की हत्या का आरोप है, वही मां अंतिम विदाई में शामिल होने की गुहार लगा रही थी.
हाईकोर्ट का मानवीय फैसला
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 21 फरवरी (शनिवार) को मानवीय आधार पर सीमित अवधि के लिए पुलिस अभिरक्षा में कर्मकांड में शामिल होने की अनुमति दी. न्यायमूर्ति आशीष नैथानी ने स्पष्ट किया कि यह राहत नियमित जमानत नहीं है, बल्कि केवल अस्थायी और मानवीय अनुमति है.
न्यायालय ने सख्त निर्देश दिए कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और कर्मकांड पूरा होने के तुरंत बाद आरोपी को दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजा जाए.
पुलिस क्या कह रही है?
देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने कहा कि कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है. चूंकि महिला मुख्य आरोपी है, इसलिए पूरी सुरक्षा के बीच ही सभी प्रक्रियाएं संपन्न कराई जाएंगी. कर्मकांड समाप्त होते ही उन्हें दोबारा अभिरक्षा में भेज दिया जाएगा.
पुलिस का दावा है कि केस मजबूत है और सभी साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं. मामले में आगे भी पूछताछ और बयान दर्ज किए जा रहे हैं..



