पहाड़ की बेटियां यहां हो रही हैं आर्मी के लिए तैयार!

विनोद कोठियाल//

पहाड़ की बेटियां यहां हो रही हैं आर्मी के लिए तैयार

बेरोजगारी और पहाड़ों में पलायन को रोकने के लिए भले ही बड़ी-बड़ी बातें अनेकों सुझाव चाहे भले ही किए जा रहे हों, किंतु अभी तक कोई भी सुझाव काम न आ सके। इसी कड़ी में पहाड़ी युवाओं की दिलों की धड़कन बना यूथ फाउंडेशन कर्नल अजय कोठियाल द्वारा बनाया गया युवाओं का समूह, जो युवाओं के लिए ही काम कर रहा है। फाउंडेशन द्वारा ब्लॉक स्तर पर पहाड़ों में सभी जनपदों में कैंप लगाए जाते हैं। जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर और बेरोजगार युवाओं का चयन किया जाता है। फिर चयनित युवाओं को ट्रेनिंग देकर फोर्स के लिए या पुलिस आदि नौकरियों के लिए तैयार किया जाता है। तीन माह की ट्रेनिंग के पश्चात अब ट्रेंड युवा भर्ती के लिए तैयार होते हैं।
वर्ष 2014 में बने फाउंडेशन ने अभी तक ट्रेंड युवकों को 2600 आर्मी और विभिन्न फोर्स के लिए चयन किया जा चुका है। यह आंकड़ा अपने आप में सुखद आश्चर्य वाला तो है ही, इसकी सफलता दर से अन्य युवकों में यूथ फाउंडेशन के प्रति भारी विश्वास पैदा हुआ है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि जब ब्लॉक स्तरीय चयन कैंप लगता है तो दूर-दूर से युवकों व युवतियों की भारी भीड़ एकत्रित होती है। जिसमें कुछ ही युवाओं का चयन किया जाना होता है।
वर्तमान में प्रदेश में प्रथम बार लड़कियों का ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं। दो अलग-अलग एक श्रीनगर में और दूसरा कैंप देहरादून में चल रहा है। देहरादून में 250 लड़कियां अलग-अलग जगहों से आई हैं। जिसमें सबसे अधिक संख्या आपदा प्रभावित रुद्रप्रयाग जनपद से हैं। हालांकि ट्रेनिंग कैंप के लिए जगह का मिल पाना काफी मुश्किल होता है। समाज के जागरूक लोगों की जनसहभागिता से ही यह संभव हो पाता है। जैसे कि बालावाला में सरदार भगवान सिंह मेडिकल कालेज के मालिक एसपी सिंह द्वारा अपने एक कॉलेज की पूरी बिल्डिंग को यूथ फाउंडेशन को ट्रेनिंग के लिए दिया गया है।
जब एसपी सिंह से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अभी और आगे चलने वाले कैंपों के लिए भी मैं अपनी जगह यूथ फाउंडेशन को दूंगा। यूथ फाउंडेशन के पास आय के कोई स्रोत न होने के कारण अलग-अलग लोगों द्वारा कैंपों के लिए या अन्य सामाजिक गतिविधियों के लिए चंदा या राशन-पानी आदि खाद्य सामग्री की व्यवस्था में सहयोग किया जाता है।
रायपुर में चलने वाले कैंप में एक स्थानीय सज्जन द्वारा कुछ दिन का आटा व अंडे देकर सहयोग प्रदान किया गया। इसके अलावा जिन युवाओं की फौज में अन्य जगह पर नियुक्ति हो चुकी है, वह भी स्वेच्छा से अपना प्रथम वेतन भी दानस्वरूप प्रदान करते हैं। एक कैंप को एक माह चलाने के लिए लगभग पांच लाख तक का खर्च आता है, क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर और बेरोजगार युवाओं से यहां पर कोई पैसा नहीं लिया जाता है। उन्हें अपने घर से केवल थाली और गिलास लेकर आना होता है। बाकी सभी व्यवस्थाएं फाउंडेशन द्वारा की जाती है। ट्रेनिंग के दौरान सोने के लिए मैट्स और स्लीपिंग बैग भी फाउंडेशन द्वारा ही दिए जाते हैं।
यह कर्नल कोठियाल का हौसला और उनकी टीम का जज्बा ही है कि इतना भारी-भरकम खर्चा होने पर भी सीमित संसाधनों से अपने ट्रेनिंग कैंपों को सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं।
युवाओं का ट्रेनिंग के दौरान सुबह 4 बजे से शाम रात्रि बजे तक का पूरा कार्यक्रम भी फौज के ही अनुरूप होता है। सुबह पीटी परेड भी फौज की ही भांति होती है। ट्रेनिंग देने के लिए फौज से रिटायर्ड लोग ही ट्रेनिंग देते हैं, जो ट्रेनिंग को बड़ी आत्मीयता से ट्रेनिंग देते हैं।
यूथ फाउंडेशन के वेब पेज पर युवा फाउंडेशन का कार्यक्रम देखते रहते हैं और उसी अनुरूप सम्मिलित होते रहते हैं। फाउंडेशन की युवा टीम और खास कर कर्नल अजय कोठियाल के जज्बे को सलाम तो बनता है।
फाउंडेशन द्वारा कराए जा रहे कार्यों से पहाड़ के उज्जवल भविष्य की उम्मीद की जा सकती है। जब तीन साल में 2600 युवाओं को आर्मी में भेज चुके हैं तो आगामी 10 वर्षों में यदि इसी रफ्तार से सेवायोजन होता रहा तो पहाड़ के जीवर स्तर में सुधार आएगा और भविष्य के लिए नए दरवाजे खुलेंगे।

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