देहरादून, जुलाई 2025: उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी मेट्रो रेल परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने दावा किया है कि देहरादून में मेट्रो के लिए आरक्षित की गई कीमती जमीन को खुर्द-बुर्द करने की साजिश रची जा रही है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस भूमि पर मेट्रो स्टेशन बनाने की बजाय अब करोड़ों रुपये की लागत से पार्क बनाए जाने की तैयारी चल रही है।
कहां है विवादित जमीन?
यह जमीन देहरादून के आईएसबीटी (ISBT) क्षेत्र के पास स्थित है। यहीं पर उत्तराखंड मेट्रो प्रोजेक्ट का एक प्रमुख स्टेशन प्रस्तावित था। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना पर अब तक 90 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर न तो कोई निर्माण हुआ और न ही कोई पत्थर या बोर्ड तक लगाया गया।
2300 करोड़ की परियोजना अंतिम सांसों पर?
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि लगभग ₹2300 करोड़ की लागत वाली मेट्रो परियोजना अब केवल फाइलों में सिमट कर रह गई है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से जुड़े दो पूर्व प्रबंध निदेशक – जितेंद्र त्यागी और बृजेश मिश्रा, बिना किसी ठोस काम के कार्यकाल पूरा कर चुके हैं और अब तीसरे एमडी की नियुक्ति की तैयारी चल रही है।
पार्क बनाने की तैयारी पर उठा सवाल
सेमवाल ने बताया कि हाल ही में विधायक विनोद चमोली, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल और एमडीडीए हाउसिंग सोसाइटी के अध्यक्ष देशराज कर्णवाल ने मिलकर इस जमीन पर पार्क बनाए जाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
देशराज कर्णवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि दिल्ली से देहरादून की दूरी अब ढाई घंटे में पूरी होगी, इसलिए आईएसबीटी क्षेत्र में एक खूबसूरत पार्क देहरादून की छवि को बेहतर करेगा।
खरीदारों को दिखाए गए थे मेट्रो के सपने
सेमवाल ने आरोप लगाया कि जब वर्ष 2017 में एमडीडीए द्वारा इस क्षेत्र में आवासीय परियोजना शुरू की गई थी, तब खरीदारों को यह बताया गया था कि यह प्रोजेक्ट मेट्रो स्टेशन से जुड़ा होगा, जिससे उन्हें सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। लेकिन अब वही खरीदार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि न तो मेट्रो का कोई काम शुरू हुआ और न ही कोई भविष्य तय है।
सरकार से विशेष ऑडिट और जांच की मांग
शिवप्रसाद सेमवाल ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि मेट्रो परियोजना के नाम पर अब तक खर्च की गई 90 करोड़ रुपये की धनराशि का विशेष ऑडिट कराया जाए। साथ ही यह जांच भी होनी चाहिए कि आखिर क्यों मेट्रो की आरक्षित जमीन पर पार्क बनाने की योजना बनाई जा रही है?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेट्रो प्रोजेक्ट के नाम पर एक आलीशान निजी ऑफिस बनाया गया है, जिसमें सरकारी पैसा खर्च हो रहा है। लेकिन जिस भूमि पर असली मेट्रो का निर्माण होना था, वहां आज तक एक भी पत्थर तक नहीं रखा गया।
मेट्रो नहीं, साजिश बन रही है?
पार्टी का आरोप है कि कुछ लोग जानबूझकर मेट्रो परियोजना को ठप करना चाहते हैं ताकि जमीन को विभिन्न निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया जा सके। पार्क का प्रस्ताव इसी योजना का हिस्सा है, ताकि बाद में भूमि का अन्य उपयोग हो सके।




