उत्तरकाशी। जनपद में किसानों की आय बढ़ाने और फसलों की उत्पादकता सुधारने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा मृदा परीक्षण (Soil Testing) अभियान तेज़ी से चलाया जा रहा है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी भूमि की नियमित जांच कराकर मिट्टी की सेहत को समझें और उसी के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करें।
कृषि विभाग के अनुसार, मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत की उर्वरता, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा उनकी कमी का सटीक पता लगाया जाता है। इसके आधार पर किसानों को यह सलाह दी जाती है कि वे किस मात्रा में जैविक या रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करें, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके।
किन तत्वों की होती है जांच
मृदा परीक्षण के तहत नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, बोरॉन जैसे मुख्य एवं द्वितीयक पोषक तत्वों के साथ-साथ जिंक, कॉपर, आयरन, मैंगनीज और मोलिब्डेनम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जांच की जाती है। इसके अलावा मिट्टी की अम्ल-क्षारीयता (pH) और विद्युत चालकता का भी विश्लेषण किया जाता है।
मात्र 193 रुपये में परीक्षण सुविधा
जनपद की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, उत्तरकाशी में किसान मात्र 193 रुपये शुल्क जमा कर अपनी मिट्टी का परीक्षण करा सकते हैं। परीक्षण के बाद किसानों को ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ जारी किया जाता है, जिसमें खेत की उर्वरता स्तर और फसलवार उर्वरक सिफारिशें दी जाती हैं।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
इस पहल से किसानों को उर्वरकों के अनावश्यक खर्च से बचत होगी और संतुलित पोषण के कारण फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार आएगा।
मुख्य कृषि अधिकारी का बयान

मुख्य कृषि अधिकारी एस.एस. वर्मा ने बताया, “मृदा परीक्षण किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें अपनी भूमि की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती है और वे वैज्ञानिक तरीके से खेती कर पाते हैं। हम सभी किसानों से अपील करते हैं कि वे इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।”
कृषि विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए विभिन्न विकास खंडों में संपर्क अधिकारियों के नंबर भी जारी किए हैं, जिनके माध्यम से किसान मृदा नमूना संग्रहण और परीक्षण से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।




