मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की अधिकारियों ने निकाली हवा

किराया लेने तक ही सिमटा जिला पंचायत
अतिक्रमण के साथ ही गंदे पानी ने भी लिया अपने आगोश में
ग्राहकों का पैदल चलना भी हुआ दुश्वार
महीने मे दो दिन होते हैं अधिकारियों के दर्शन

मनोज नौडियाल

कोटद्वार। नगर की धड़कन कही जाने वाली जिला पंचायत मार्केट को अतिक्रमण के साथ साथ अब गन्दा पानी भी अपने आगोश में समेटता नजर आ रहा है।
नगर की सबसे व्यस्त मार्किटों में से एक जिला पंचायत मार्किट जिस में लगी पानी की टैंकी से आने वाले पानी की निकासी के लिए एक पाईप लाइन डाली गई थी। जिसके चोक होने की वजह से गंदा पानी अब सड़कों पर बहता रहता है।
इस व्यस्ततम मार्किट में सुबह से लेकर शाम तक सैकड़ो ग्राहक व स्थानीय निवासियों आते जाते रहते है। जिन्हें इस गंदे पानी मे से होकर गुजरना पड़ रहा है।
इस मार्किट को अतिक्रमण मुक्त करने के लगभग एक माह पूर्व  नोटिस जारी तो किये गए थे पर वह नोटिस भी मात्र दिखावा ही रह।
इस मार्किट में हो रहे अतिक्रमण का आलम यह है कि जिला पंचायत मार्किट नगर के साथ साथ निकटवर्तीय क्षेत्रों की भी धड़कन है। जिसमे बीसियों फुट व्यापारियों द्वारा अतिक्रमण किया गया है । जिस कारण वहां आ रहे ग्राहकों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। इन व्यापारियों द्वारा किये गए अतिक्रमण का आलम यह है कि यदि किसी ग्राहक के द्वारा व्यापारियों का समान गिर जाता है तो यह व्यापारी उसके साथ गालीगलौच कर हाथापाई तक करने लग जाते है। इन व्यापारियों में से कुछ ने तो अपनी दुकानों के बाहर सीमेंट से पक्के निर्माण कर उनमे लोहे के सेटर लगवा रखे है। जो कि पूर्ण रूप से अवैध है। इस मार्किट के अतिक्रमण को लेकर कई बार स्थानीय ग्राहकों ने इसकी शिकायत अधिकारियों व कनिष्ट अभियंता से की है। परन्तु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
गौरतलब है कि खुद जिला पंचायत अध्यक्ष दिप्ती रावत द्वारा लगभग तीन माह पूर्व इस मार्केट में हो रखे अवैध अतिक्रमण व सीमेंट के बने थल्लों की वीडियोग्राफी तक करवाई गई थी। और मार्किट को अतिक्रमण मुक्त करने की बात कही गई थी । जिसके बाद तीन मई को व्यापारियों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस भी अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत द्वारा दिए गए थे। जिसकी प्रतिलिपि उपजिलाधिकारी, थाना प्रभारी, सहायक नगरनिगम आयुक्त,जिला पंचायत अभियंता व कनिष्ट अभियंता को दी गई थी। जिसमे अतिक्रमण मुक्त करने की कार्यवाही के बाद जिला पंचायत कार्यालय को रिपोर्ट देने की बात की गई थी। पर किसी भी अधिकारी द्वारा नोटिस को गंभीरता से नही लिया गया। ऐसे में व्यापारियों द्वारा भी उस नोटिस को रद्दी का टुकड़ा समझ डस्टबिनों में डाल दिया गया। जैसे ये नोटिस आना रोजमर्रा की बात हो।
गौरतलब है कि कई बार इस कि शिकायत छोटे अधिकारियों के साथ साथ बड़े अधिकारियों को भी की गई है पर आलाधिकारियों की नींद तक खुलने को तैयार नही है। ऐसे मे आम जन अपनी समस्या लेकर जाएं भी तो कहां जाए।

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