खाली बैठे अध्यापकों को आग बुझाने के ड्यूटी। शिक्षक नेता आक्रोशित।

लॉक डाउन के दौरान स्कूल बंद हैं, ऐसे में अध्यापकों को आग बुझाने की अपेक्षा की गयी  है। उत्तरकाशी जिले के जिलाधिकारी ने सभी शिक्षक संघों से अपेक्षा की है कि वे अपने-अपने इलाकों में वनाग्नि रोकने के लिए शिक्षकों की तैनाती करें।
शिक्षक नेताओं में इसको लेकर अभी से आक्रोश पैदा हो रहा है।
 जिला अधिकारी जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के भी अध्यक्ष हैं इसलिए उत्तरकाशी के जिला अधिकारी ने माध्यमिक शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ और जूनियर शिक्षक संघ को कहा है कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सभी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कार्य कर रहे हैं, इसलिए जनमानस को जागरूक करना काफी जरूरी है ताकि इस महामारी पर पूर्ण विजय प्राप्त की जा सके।
 राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री सोहन सिंह माजिला ने जिलाधिकारी की इस अपील पर विरोध जताते हुए कहा है कि “अध्यापकों की ड्यूटी पहले से ही स्मार्ट क्लासेस से लेकर देहरादून के हॉटस्पॉट इलाकों में लगाई गई है। ऐसे में जंगलों में आग बुझाने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाना हास्यास्पद है, इसका विरोध किया जाएगा।”
हालांकि शिक्षक संघों के सहमत ना होने पर जिलाधिकारी की कोशिश रहेगी कि वह शिक्षकों का सदुपयोग ऑनलाइन क्लासेस और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में करना चाहेंगे।
जिलाधिकारी का आदेश
 जिलाधिकारी ने अध्यापकों को कोरोनावारियर्स का दायित्व देते हुए कहा कि वर्तमान समय जंगलों में आग लगने की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और अधिकांश घटनाएं अप्रैल-मई में होती हैं, इसलिए अध्यापकों को विद्यालय के बंद रहने दौरान जंगल की आग बुझाने के लिए तैनात करना आवश्यक है।
 इसके लिए प्रभागीय वन अधिकारियों को को भी कहा है कि वे शिक्षकों को वनों की आग को रोकने के उपाय और तकनीकी के संबंध में ट्रेनिंग देंगे।

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