जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

रिपोर्ट महेश चंद  पंत ,ऊधम सिंह नगर।

जिलाधिकारी श्रीमती रंजना राजगुरु की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में स्रोत सम्वर्द्धन कार्यक्रम (एसआरपी) पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को अधिक से अधिक जल संरक्षण एवं सम्वर्द्धन हेतु कार्य करने को कहा।

 उन्होंने कहा कि, पानी के बिना जीवन नहीं है, जल ही जीवन है, जल को संरक्षित करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि गिरते हुए जल स्तर को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि, जिस प्रकार से निरंतर जल स्तर गिरता जा रहा है वह एक चिंता का विषय है। 

उन्होने कहा कि, इसके लिए हम सभी को मिल कर अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें पानी की एक-एक बूंद को बचाना होगा ताकि आने वाली पीढ़ी को पानी के संकट से बचाया जा सकता है।  

        निदेशक एनआरडीएमएस कुमाऊं विवि अल्मोड़ा डा0 जेएस रावत ने कहा कि, जल संरक्षण व संवर्धन के लिये सभी को मिल कर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि, जिस तरह से लगातार जलस्तर घट रहा है जिससे आने वाले समय के लिए अच्छे संकेत नहीं है। 

उन्होंने कहा कि, हमें जल स्रोत को पुनर्जीवित करने की जरूरत है जिसके लिये हमें संकल्प के रूप में जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने कहा कि, अधिकारी जल संवर्धन के क्षेत्र में जो भी कार्य कर रहे है उन्हे अच्छे तरह से समझे व किये जा रहे कार्य भविष्य के लिये उपयोगी हो इस पर विशेष ध्यान दे।

 उन्होंने कहा कि, इसके लिए हमें जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न संस्थानों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, हम सभी को मिल कर नदियों, नालों, तालाबों, जल स्रोतों के पानी को पुनर्जीवित करने हेतु आवश्यक कदम उठाने होंगे।

 उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कहा कि, हमें मिशन के तहत काम करने की जरूरत है। उन्होने कहा कि हमारा उद्देश्य धरती की गोद में पानी को कैसे समाहित कर सकें ताकि कम हो रहे जल स्तर को रोका जा सकें। उन्होने कहा कि बहते हुये नदी, नालों व वर्षा के पानी को हमे रोकने का प्रयास करना होगा। उन्होने कहा कि जिस प्रकार से लगातार जलस्तर घट रहा है वह एक ज्वलंत विषय है इस पर सबको मिलकर काम करने की जरूरत है। 

उन्होने सम्बन्धित नोडल अधिकारियों से जल संवर्द्धन हेतु किये जा रहे कार्यो की विकास खण्ड वार जानकारी ली। उन्होने कहा कि प्रयोग में लाये जा रहे पानी को रिचार्ज पिट बनाकर पानी को संरक्षित करें जो गिरते जल स्तर में मददगार साबित हो सकता है। 

उन्होंने कहा कि, औद्योगिक संस्थानों में जो पानी प्रयोग किया जाता है उसे रिचार्ज पिट बनाकर जल संरक्षण करने की आवश्यकता है ताकि गिरते जल स्तर को रोका जा सके।

       जिला विकास अधिकारी डा0 महेश कुमार ने पावर प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि जनपद में 32 जल स्रोत चयनित किये गये है जिसका मैप तैयार कर लिया गया है व सम्बन्धित विभाग द्वारा जल संवर्धन हेतु कार्य किया जा रहा है।  

      इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु खुराना, पीडी हिमांशु खुराना, डीडीओ डा0 महेश कुमार, एमएनए श्रीमती रिंकू बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी उदय प्रताप सिंह, डीपीआरओ विद्या सिंह सोमनाल, उप निदेशक रेशम हेमचन्द्र आर्य, डीएसओ तेजवन्त सिंह, खण्ड विकास अधिकारी, नवीन उपाध्याय,एमसी जोशी, एचसी जोशी, राजेश कुमार यादव, चिन्ता राम आर्य, विनीत, रिद्किा आदि उपस्थित थे।

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