नैनीताल, उत्तराखंड। वन विभाग के शीर्ष पद PCCF/Head of Forest Force (HoFF) की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में दायर याचिका को यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि सेवा नियमों से जुड़े ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के पास है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह विषय सीधे तौर पर CAT के क्षेत्राधिकार में आता है।
वरिष्ठता को लेकर उठी आपत्ति
1992 बैच के एक वरिष्ठ IFS अधिकारी ने राज्य सरकार की उस नियुक्ति को चुनौती दी थी, जिसमें HoFF पद की जिम्मेदारी उनके बजाय 1993 बैच के अधिकारी को सौंप दी गई। उनका कहना था कि यह निर्णय निर्धारित वरिष्ठता मानकों के विपरीत है।
कोर्ट ने उठाया सवाल—‘CAT मौजूद है तो याचिका यहां क्यों?’
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि Administrative Tribunals Act, 1985 के अनुसार ऐसे सेवा विवादों का निपटारा CAT द्वारा किया जाना चाहिए। अदालत ने यह प्रश्न भी उठाया कि जब वैधानिक उपाय उपलब्ध है तो मामला हाईकोर्ट में क्यों लाया गया।
याचिकाकर्ता ने केस हाईकोर्ट से वापस लिया
अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि वे याचिका वापस लेना चाहते हैं और CAT की प्रिंसिपल बेंच, दिल्ली में मूल आवेदन दायर किया जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नैनीताल सर्किट बेंच महीने में केवल एक बार बैठती है, जिससे सुनवाई में देरी की आशंका है।
CAT में प्राथमिकता से सुनवाई के संकेत
कोर्ट ने कहा कि यदि मामला CAT में दायर किया जाता है, तो उसकी गंभीरता को देखते हुए नैनीताल सर्किट बेंच में इसे प्राथमिकता के आधार पर लिया जा सकता है।
शासन ने तबादले का आदेश भी रोका
इधर, अदालत की कार्यवाही के बीच, शासन ने बीपी गुप्ता को जैव विविधता संबंधी जो नई जिम्मेदारी सौंपी थी, उसे वापस ले लिया है। 10 दिसंबर के आदेश को स्थगित करते हुए उन्हें उनके पूर्व पदस्थापन पर ही कार्यरत रहने का निर्देश जारी किया गया है।




