राजकाज

कैबिनेट ब्रेकिंग :  गैरसैंण में जमीनों की खरीद-फरोख्त से सरकार ने हटाई रोक। बाहर वाले भी खरीद सकेंगे जमीन

देहरादून। उत्तराखण्ड कैबिनेट बैठक में 12 बिंदुओं पर हुई चर्चा

11 मुद्दों पर लगी कैबिनेट की मुहर

  देहरादून के मुख्यमंत्री आवास में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। गैरसैंण में जमीनों की खरीद-फरोख्त से रोक हटा दी गई है।
 गौरतलब है कि वर्ष 2010 में गैरसैंण मे राजधानी बनाये जाने की घोषणा की गई थी।
नवम्बर  2012 में विजय बहुगुणा ने गैरसैंण में जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी थी। लेकिन इस दौरान भी पावर ऑफ अटॉर्नी और स्टांप पेपर के आधार पर काफी जमीने बाहर के लोगों ने खरीद ली, जिसका राजस्व भी सरकार को नहीं मिला।
 इसके बाद वर्ष 2014 में गैरसैंण विकास प्राधिकरण बन गया और जमीनों की खरीद-फरोख्त पर काफी हद तक रोक लग गई।
 2017 में भाजपा की सरकार आई तो फरवरी 2018 में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर जांच बिठा दी।
 जिसमें जिला अधिकारी की रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि सबसे अधिक जमीनों की बिक्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में हुई।
 रिपोर्ट में कहा गया कि गैरसैंण, भराड़ी सैम, ग्वालदम और कर्णप्रयाग के आसपास की लगभग 90 नाली जमीन बाहर के लोगों ने स्टांप ड्यूटी ना चुकाते हुए केवल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर खरीद ली,  जिससे सरकार को भी नुकसान हुआ।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी इसकी जांच के लिए बना दी।
 इस कमेटी ने मई 2019 में अपनी रिपोर्ट में कहा कि गैरसैंण में में विकास कार्य इसलिए नहीं हो रहे हैं, क्योंकि वहां जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगी हुई है।
 तभी से सरकार जमीनों की खरीद-फरोख्त से रोक हटाने की तैयारी कर चुकी थी और आज कैबिनेट बैठक में इस पर फाइनल मुहर लग गई।
 गौरतलब है कि सरकार ने बजट न होने के कारण अपने बलबूते गैरसैण का विकास करने से हाथ खड़े कर दिए हैं और अब हाई पावर कमिटी की रिपोर्ट के अनुसार गैरसैण का विकास तभी हो सकता है, जब बाहर के लोग आए यहां पर जमीनें खरीदें और यहां पर कुछ उद्योग धंधा जमाए।
 कमेटी का मानना है कि उत्तराखंड के लोगों के बलबूते और सरकार के दम पर गैरसैंण का विकास नहीं हो सकता इसलिए गैरसैण में जमीन खरीदने पर लगी हुई पाबंदी को हटा दिया जाए।
 गौरतलब है कि स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि भी सरकार से कई बार मांग कर चुके थे कि जमीन की बिक्री पर पाबंदी होने के कारण लोग पलायन कर रहे हैं।
कैबिनेट के अन्य फैसले

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