उत्तराखंड राजस्व विभाग एवं तत्कालीन जिलाधिकारी देहरादून पर वन भूमि के अवैध आवंटन का गंभीर आरोप

देहरादून जनपद के ईस्ट होप टाउन क्षेत्र में खाता संख्या 02493, खसरा संख्या 384/1 में दर्ज 0.1170 हेक्टेयर “साल जंगल” (वन भूमि) को वर्ष 2011 में देहरादून के तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी को आवंटित किया जाना गंभीर कानूनी उल्लंघन का मामला बनता जा रहा है। उक्त भूमि राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से वन श्रेणी में दर्ज है, फिर भी इसे  पर्यावरणविद् अनिल जोशी को आवंटित किया गया। उस पर HESCO NGO का भवन निर्माण कराया गया।

इस आवंटन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत संघ (TN Godavarman Case) के ऐतिहासिक निर्णय तथा वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है, जिसमें गैर-वन प्रयोजनों हेतु वन भूमि के उपयोग के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य की गई है।

यह मामला न केवल वन कानूनों की अवहेलना है, बल्कि यह प्रशासनिक मिलीभगत, नियमों की अनदेखी और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर वन विनाश का खतरनाक उदाहरण भी है।

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के पर्यावरण प्रकोष्ठ अध्यक्ष योगेश इस्टवाल राजस्व विभाग एवं जिलाधिकारी देहरादून से मांग कि है कि—

1. इस अवैध आवंटन की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।

2. दोषी अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक व विभागीय कार्रवाई की जाए।

3. अवैध निर्माण हटाकर वन भूमि को मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।

4. भविष्य में वन भूमि के दुरुपयोग को रोकने हेतु सख्त नीति एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाए।

यह मामला पर्यावरण संरक्षण की साख, न्यायिक आदेशों की अवमानना और जनहित से जुड़ा है, जिस पर तत्काल और कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

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