एक्सक्लूसिव खुलासा

खुलासा (पार्ट-3 ) वीडियो : सरकार ने कोस्ट गार्ड के लिए जमीन कब्जाई तो हाई कोर्ट गए मुकेश

कोस्ट गार्ड कार्यालय खोलने के लिए सरकार ने देहरादून के कुआंवाला में मुकेश की जमीन से बिना इजाजत के रास्ता निकाला तो मुकेश जोशी हाई कोर्ट चले गए हैं। अब हाई कोर्ट के निर्णय पर ही सब की निगाहें टिकी हैं।
मूलतः बागेश्वर के चौगांवछीना निवासी मुकेश जोशी की आपबीती लीजिए आप भी सुनिए उन्हीं की जुबानी
देखिए वीडियो

 

पर्वतजन के पाठकों को हम एक बार फिर से बता दें कि देहरादून के हरिद्वार रोड पर बागेश्वर जिले के मूल निवासी मुकेश जोशी की जमीन है। मुकेश जोशी की जमीन के पीछे ग्राम समाज की भूमि है। इस जमीन के लिए सीधा रास्ता नहीं है। पहले भी इस ग्राम समाज की जमीन पर सरकारी कार्यालय खोले जाने के लिए कोशिश की जा चुकी है लेकिन रास्ता ना होने के कारण बात नहीं बनी।
 26 जून को अचानक इस जमीन पर कोस्ट गार्ड भर्ती कार्यालय खोलने का निर्णय लिया गया तो रास्ता ना होने पर सरकारी मशीनरी ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर जबरन मुकेश की जमीन से बाउंड्री वाल तोड़ते हुए रास्ता बना दिया था।
 मुकेश जोशी का कहना है कि उन्हें सरकार के लिए जमीन देने में कोई एतराज नहीं, लेकिन इसके लिए तय भूमि अधिग्रहण अथवा किसी प्रकार का नोटिस दिए जाने  जैसी कानूनी कार्यवाही की जानी सरकार ने जरूरी नहीं समझी।
 जोशी के अधिवक्ता योगेश सेठी ने पर्वतजन से कहा कि यह भूमि श्रींग कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रखी थी लेकिन बाद में लोन न चुकाने पर सरफेसी एक्ट के अंतर्गत जमीन नीलाम कर दी गई और मुकेश जोशी ने बैंक से खरीद ली थी। ऐसे में अपने क्लाइंट के हितों की रक्षा के लिए वे कोर्ट की शरण में गए हैं।
पहले प्रवासियों को बुलाते है, फिर ऐसा सलूक !
 गौरतलब है कि मुकेश जोशी के पिता-दादा कई साल पहले रोजगार की तलाश में दिल्ली आ गए थे।
मुकेश जोशी कहते हैं कि सरकार पलायन रोकने की बात करती है और प्रवासियों को वापस आने का आह्वान करती है,लेकिन कोई वापस आना चाहे तो उलटा व्यवहार करती है।
मुकेश जोशी बताते हैं कि उनकी बिटिया देहरादून के मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है। इस जमीन पर उनका अपनी बेटी के लिए अस्पताल खोलने की योजना थी और वह वापस अपनी उत्तराखंड की सेवा करने के लिए आना चाह रहे थे लेकिन “जब सरकार वापस आ रहे लोगों के साथ इस तरह की तानाशाही वाला सलूक करेगी तो भला कौन वापस आना चाहेगा !” बहरहाल जबरन मुकेश की जमीन पर इस तरह रास्ता बनाये जाने की सभी तरफ आलोचना हो रही है। देखना यह है कि हाईकोर्ट मुकेश जोशी की अपील पर क्या निर्णय लेता है।
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