अबकी बारी कुटुंबदारी

विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नेताओं के परिजनों को महसूस हो गया है कि यदि इस बार विधायक नहीं बने तो कभी नहीं बन पाएंगे। कांग्रेस संगठन द्वारा विधायकी का चुनाव लडऩे के इच्छुक लोगों द्वारा आवेदन मांगने के बाद जिस प्रकार मुख्यमंत्री के बड़े बेटे वीरेंद्र रावत ने खटीमा और हरीश रावत के […]

विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नेताओं के परिजनों को महसूस हो गया है कि यदि इस बार विधायक नहीं बने तो कभी नहीं बन पाएंगे। कांग्रेस संगठन द्वारा विधायकी का चुनाव लडऩे के इच्छुक लोगों द्वारा आवेदन मांगने के बाद जिस प्रकार मुख्यमंत्री के बड़े बेटे वीरेंद्र रावत ने खटीमा और हरीश रावत के समधी विजय सिजवाली ने कालाढुंगी से विधायकी की दावेदारी ठोकी है। हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत ने हरिद्वार ग्रामीण से दावेदारी ठोकी है, उससे शीघ्र ही मुख्यमंत्री के दूसरे बेटे आनंद रावत व बेटी अनुपमा के साथ-साथ काबीना मंत्री यशपाल आर्य, इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह के परिजनों ने भी अपना-अपना बायोडाटा बनाना शुरू कर दिया है। अभी तक एक परिवार से एक व्यक्ति को टिकट देने की परंपरा के बीच वीरेंद्र रावत द्वारा ठोकी गई ताल से यदि परिदृश्य बदलता है तो लखनऊ से जन्मदिन मनाने हल्द्वानी पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के जैविक पुत्र रोहित शेखर को भी विधायकी का टिकट मिल सकता है। देखना है कि घर-घर हरदा के नारे के बीच हरदा किस प्रकार अब अपनी और अपनों की कुटुंबदारी को एडजस्ट करते हैं।

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