नोटबंदी से ब‌िगड़ा बैंकों का अर्थशास्त्रः जरूरत है 4500 करोड़, मिल रहे हैं सिर्फ 976 करोड़

500 और 1000 रुपये की नोटबंदी से बैंकों का अर्थशास्त्र बिगड़ गया है। जिले के 715 बैंक शाखाओं को मांग के बदले केवल 22 फीसदी रकम मिल रही है। करेंसी चेस्ट वाले बैंकों को मांग के बदले 40 फीसदी रकम दी जा रही है। जिससे आम लोगों के साथ बैंक के आला अधिकारी भी परेशान […]

500 और 1000 रुपये की नोटबंदी से बैंकों का अर्थशास्त्र बिगड़ गया है। जिले के 715 बैंक शाखाओं को मांग के बदले केवल 22 फीसदी रकम मिल रही है। करेंसी चेस्ट वाले बैंकों को मांग के बदले 40 फीसदी रकम दी जा रही है। जिससे आम लोगों के साथ बैंक के आला अधिकारी भी परेशान हैं और लगातार आपूर्ति बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मांग कर रहे हैं।
साइबर सिटी में 44 राष्ट्रीय और निजी बैंकों की 715 शाखाएं हैं। इन बैंकों की रोजाना की जरूरत 4500 करोड़ रुपये है, लेकिन इन्हें केवल 976 करोड़ रुपये की आपूर्ति हो रही है।

इन बैंकों में छह बैंक एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब नेशनल बैंक, कॉरपोरेशन बैंक और सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के करेंसी चेस्ट गुरुग्राम में हैं, लेकिन उनके पास भी नए नोटों की मांग और आपूर्ति मेें भारी कमी है। 6 बैंकों के 239 शाखाओं के लिए 1248 करोड़ रुपये की मांग है। इसके बदले 500 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं।

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