तीरथ रावत का बंदर प्रेम: दिखावा या समस्या बढ़ाना?

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता तीरथ सिंह रावत ने बीते दिन अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे सड़क किनारे खड़े होकर बंदरों को दाना डालते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। बता दें कुछ दिन पूर्व कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य जी ने बंदरों को खाना खिलाया, और अब पूर्व मुख्यमंत्री।

दरअसल, वन्यजीवों को इस तरह खाना खिलाना Wildlife Protection Act के प्रावधानों के खिलाफ है और इससे बंदरों की आबादी बढ़ती है, जो किसानों की फसलों को बर्बाद कर रही है। प्रदेश के लोग बंदरों से त्रस्त हैं – फसलें चौपट, घरों में हमले, लेकिन नेता जी फोटो ऑप के लिए दाना डाल रहे हैं!

याद कीजिए रावत जी, उत्तराखंड बनने से लेकर आज तक आपने कितने उच्च पद संभाले – भाजपा के प्रदेशअध्यक्ष, सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक। लेकिन पहाड़ में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए क्या किया?

कोई कुटीर उद्योग खोला जो युवाओं को पहाड़ में ही रोजगार दे?

कोई ऐसा शिक्षण संस्थान जहां पहाड़ के बच्चे JE, NEET या IAS की तैयारी कर सकें बिना शहर भागे?

कोई अस्पताल जहां बूढ़ी मां-बाप का इलाज हो सके बिना देहरादून-दिल्ली के चक्कर लगाए?

कुछ नहीं! सिर्फ राजनीति चमकाई, वोट बटोरे और अब बुढ़ापे में बंदरों, गायों, कौवों को दाना खिलाकर पुण्य कमाने का दिखावा।

पलायन का सबसे बड़ा कारण उत्तराखंड के नेता हैं – जिनमें आप भी शामिल हैं रावत जी। प्रदेश की जनता इन बंदरों से त्राहि-त्राहि कर रही है, और आपकी सरकार में ये समस्या और बढ़ रही है।

समाधान निकालिए – बंदरों के लिए अलग गांव बसाइए, स्टेरलाइजेशन बढ़ाइए, लोगों को फीडिंग से रोकिए। दिखावे की राजनीति बंद कीजिए!

वहीं वायरल वीडियो के बाद फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर दर्जनों कमेंट्स आए, जिनमें प्रमुख हैं:

एक यूजर ने लिखा, “दुखद है। अब यही काम बचा है क्योंकि नरेंद्र मोदी जी किसी को कुछ करने ही नहीं देते।”

दूसरे ने व्यंग्य करते हुए कहा, “अब ये 10 दिन तक भूख के बिना रह सकता है।”

एक अन्य कमेंट में कानूनी पक्ष उठाया गया, “रावत जी वन्यजीवों को खाद्य पदार्थ देना वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 की धारा 32 के अंतर्गत दंडनीय वन अपराध है।”

कई यूजर्स ने राजनीतिक उपलब्धियों पर सवाल उठाते हुए लिखा, “अब बुढ़ापे में बंदरों को ही दाना खिलाना है। पाठ करो रावत जी, जब से उत्तराखंड बना तब से और अब तक आपने क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए क्या काम किया?”

एक कमेंट में समाधान सुझाए गए, “नेता जी को पता होना चाहिए बंदरों को सड़क किनारे खिलाना गलत है, इस कारण कई बाइक वाले हादसे के शिकार होते हैं और बंदर भी मर रहे हैं।”

कुछ ने पूछा, “ये बंदर कहां से उठा कर लाए हो? और किस गांव में छोड़ दिए हैं?”

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