पहले शिक्षा निदेशालय, अब आशारोड़ी वन कार्यालय—हमलों से मचा हड़कंप

देहरादून में शनिवार का दिन प्रशासनिक तंत्र के लिए बेहद संवेदनशील साबित हुआ। पहले शिक्षा निदेशालय में जनप्रतिनिधि और उनके समर्थकों के हंगामे की घटना सुर्खियों में रही, और उसी दिन वन विभाग के आशारोड़ी रेंज कार्यालय में भी तोड़फोड़ और उत्पात का मामला सामने आ गया। एक ही दिन में दो प्रमुख सरकारी कार्यालयों में हुई इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

ताजा मामला देहरादून स्थित आशारोड़ी रेंज कार्यालय का है, जहां कुछ लोग अचानक पहुंचे और परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि कार्यालय में घुसकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया तथा अधिकारियों की गाड़ियों को भी क्षति पहुंचाई गई। कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की कोशिश की बात भी सामने आई है। घटना के दौरान दफ्तर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्टाफ खुद को असुरक्षित महसूस करता नजर आया।

वन विभाग के अनुसार विवाद की पृष्ठभूमि धारा 4 के अंतर्गत आने वाली उस भूमि से जुड़ी है, जहां कथित रूप से अवैध निर्माण किया जा रहा था। विभागीय टीम ने नियमों के अनुरूप मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया और इसे अवैध बताया। इसी कार्रवाई से नाराज होकर संबंधित पक्ष के लोग आशारोड़ी रेंज कार्यालय पहुंच गए और आक्रोश में आकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। बताया गया है कि उपद्रवियों की संख्या अधिक थी और उनका व्यवहार आक्रामक था।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है। वायरल फुटेज में एक व्यक्ति कार्यालय परिसर में हंगामा करता दिखाई दे रहा है, जबकि कर्मचारी उसे समझाने का प्रयास कर रहे हैं। कर्मचारियों के चेहरे पर भय और असहायता साफ झलकती है। यह दृश्य इस चिंता को और गहरा करता है कि क्या सरकारी अधिकारी अपने कार्यस्थलों पर सुरक्षित हैं।

आशारोड़ी रेंज से जुड़े अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी है और वायरल वीडियो की भी पड़ताल की जा रही है। विभाग का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रेंज के रेंजर रविंद्र वेदवाल ने बताया कि टीम अवैध कब्जे और निर्माण को रोकने के लिए मौके पर गई थी। कार्रवाई के दौरान निर्माण कार्य बंद कराया गया, जिससे कुछ लोग नाराज हो गए। बाद में वे कार्यालय पहुंचे और वहां तोड़फोड़ की। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के साथ मारपीट का प्रयास किया गया।

एक ही दिन में शिक्षा विभाग और वन विभाग के कार्यालयों में हुई घटनाओं ने प्रशासनिक सुरक्षा ढांचे को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। यदि कानून लागू करने वाले विभागों पर ही इस प्रकार खुलेआम हमले होते रहेंगे, तो कानून के प्रति आमजन में विश्वास और भय दोनों प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी परिसरों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाना समय की मांग है।

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