आज दिनांक 2 फरवरी 2026 को भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के कार्यालय में *आयुष शिक्षा में रोजगार के अवसर* विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डा. जे एन नौटियाल द्वारा भगवान धन्वंतरि की पूजा व दीप प्रज्वलन करके किया गया।
बैठक में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के समस्त बोर्ड सदस्यों, जो की वर्तमान में आयुर्वेदिक चिकित्सा व चिकित्सा शिक्षा से जुड़े हुए हैं, को आमंत्रित किया गया था। जिसमें बोर्ड उपाध्यक्ष डॉक्टर वीरेंद्र सिंह, सदस्य डॉक्टर दिनेश जोशी, डॉक्टर धीरज कुमार त्यागी, डॉक्टर अजीत तिवारी, डॉक्टर बालकृष्ण पवार, डॉक्टर पंकज बच्चस तथा डॉक्टर सुनील आर्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को प्रारंभ करते हुए भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के रजिस्ट्रार श्रीमती नर्वदा गुसाईं द्वारा भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड द्वारा संचालित किया जा रहे पाठ्यक्रमों जिसमें आयुर्वैदिक फार्मेसी आयुर्वेदिक नर्सिंग आयुर्वेदिक पंचकर्म तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायक सम्मिलित हैं, के विषय में जानकारी दी गई तथा बताया गया कि वर्तमान में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड में लगभग 6000 से अधिक प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ पंजीकृत है। भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड द्वारा प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं जिसमें कार्यशालाओं का आयोजन, रिफ्रेश्वर कोर्स चलाया जाना, कॉलेज स्तर पर प्रतियोगिताएं कराई जाना तथा समय-समय पर प्रयोगात्मक कार्य की स्थिति जांचने हेतु निरीक्षण किया जाना प्रमुख है। रजिस्ट्रार द्वारा भारतीय चिकित्सा परिषद के वर्तमान बोर्ड द्वारा छात्र छात्राओं के प्रशिक्षण तथा उनकी शिक्षा के स्तर को बढ़ाए जाने के लिए किए गए बोर्ड के प्रयासों की भी सराहना की गई। इस कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा आयुष के क्षेत्र में किस प्रकार छात्राओं को रोजगार के अवसर प्रदान हो इस संबंध में अपने-अपने विचार व्यक्त किए गए जिसमें रोजगार हेतु निम्नलिखित सुझाव दिए गए
1. उत्तराखंड में औषधीय की बहुतायत है इसलिए यदि प्रशिक्षित छात्र छात्राओं को औषधि की कृषि किए जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो वह इसे अपने साथ-साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकेंगे।
2. फार्मास्यूटिकल कंपनियों में सेमी रो प्रोडक्ट की मांग बड़ी है अर्थात औषधियों को प्रयोग करने लायक रूप में तैयार कर कंपनियों को दिया जाता है यदि प्रशिक्षित छात्र छात्राएं इसके लिए छोटे-छोटे प्लांट लगाएं तो इससे स्वरोजगार के साथ-साथ अन्य लोगों को रोजगार भी प्राप्त हो सकता है ।
3. राज्य में जितने भी वैलनेस, पंचकर्म वह योग केंद्र है उनमें अनिवार्य रूप से भारतीय चिकित्सा परिषद में पंजीकृत पैरामेडिकल स्टाफ को ही नियुक्त किया जाए।
4. प्रशिक्षित छात्राओं को भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी जाए जिससे वह रोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकें तथा स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकें।
5. योग में प्रशिक्षित छात्र-छात्राओं को उनके स्थानीय क्षेत्र में ही योग प्रशिक्षण केंद्र खोले जाने तथा लघु कालिक प्रशिक्षण दिए जाने हेतु प्रोत्साहित किया जा सकता है ।
6. छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के दौरान ही रोजगार व स्वरोजगार के विषय में भी जानकारी दी जाय ताकि प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरांत वे स्वरोजगार व रोजगार के लिए प्रयास करें।
7. उत्तराखंड राज्य में चार धामों, ट्रैकिंग स्थलों व अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की पंचकर्म थेरेपी व योग चिकित्सा किए जाने हेतु भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड से प्रशिक्षित व पंजीकृत अभ्यर्थियों को विशेष अनुमति दिए जाने हेतु राज्य सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक संख्या में प्रशिक्षित को लाभ मिल सके।
अंत में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ जे एन नौटियाल द्वारा आयुष शिक्षा में रोजगार के अवसर विषय पर अपना वक्तव्य दिया गया जिसमें उनके द्वारा बताया गया की उत्तराखंड राज्य में स्थित आयुर्वैदिक फार्मेसी तथा फार्मास्यूटिकल कंपनियों में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड द्वारा प्रशिक्षित हुआ पंजीकृत फार्मासिस्टों को ही रोजगार दिया जाना चाहिए। इसके लिए शीघ्र ही प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रेषित किया जाएगा तथा आयुर्वेद निदेशालय के साथ मिलकर इस संबंध में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि राज्य में तथा राज्य से बाहर स्थित आयुर्वेदिक केंद्रों, पंचकर्म केंद्रों, योग केंद्रों व प्राकृतिक चिकित्सा केंद्रों में प्रशिक्षित मानव शक्ति उपलब्ध कराए जाने हेतु भी भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड द्वारा एक प्लेसमेंट सेल का गठन किया गया है जिसके माध्यम से जिन संस्थाओं व केंद्रों को प्रशिक्षित आयुर्वेदिक, यूनानी पैरामेडिकल स्टाफ की आवश्यकता होती है उन्हें भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड द्वारा मानव शक्ति उपलब्ध कराई जाती है जिसके क्रम में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड द्वारा 250 से अधिक छात्र छात्राओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है तथा वर्तमान में भी विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा पंचकर्म सहायकों की मांग की गई है जिसके लिए कार्रवाई की जा रही है।
अंत में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष डा. जे एन नौटियाल तथा रजिस्ट्रार श्रीमती नर्वदा गुसाईं द्वारा सभी का धन्यवाद दिया गया तथा बताया कि भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित छात्र छात्राओं को रोजगार उपलब्ध कराए जाने हेतु और अधिक प्रयास किए जाएंगे।
इस अवसर पर भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।



