नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) से जुड़ा एक बड़ा और राहतभरा फैसला लिया है। सरकार ने अनुकंपा (Compassionate Ground) के आधार पर नियुक्त हुए हजारों कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का रास्ता खोल दिया है।
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार अब पात्रता तय करने में नियुक्ति पत्र की तारीख नहीं, बल्कि नौकरी के लिए किए गए आवेदन की तारीख को आधार माना जाएगा। इस फैसले से लंबे समय से OPS की मांग कर रहे हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
क्या है केंद्र सरकार का नया आदेश?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन परिवार के सदस्यों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले आवेदन किया था, लेकिन किसी कारणवश उनकी नियुक्ति 1 जनवरी 2004 या उसके बाद हुई, उन्हें भी पुरानी पेंशन योजना (OPS) चुनने का विकल्प दिया जाएगा।
हालांकि इसके लिए यह जरूरी होगा कि आवेदन के समय संबंधित उम्मीदवार अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र रहा हो।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय विभिन्न मंत्रालयों, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा व्यय विभाग के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
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किन कर्मचारियों को मिलेगा OPS का लाभ?
नए आदेश के तहत उन कर्मचारियों को लाभ मिलेगा—
- जिनकी नियुक्ति अनुकंपा आधार पर हुई है।
- जिन्होंने 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले आवेदन किया था।
- जिनकी नियुक्ति 1 जनवरी 2004 या उसके बाद हुई।
- जो आवेदन के समय नियुक्ति के लिए पात्र थे।
ऐसे कर्मचारियों को अब CCS (Pension) Rules, 2021 के तहत पुरानी पेंशन योजना चुनने का अवसर मिलेगा।
कर्मचारी संगठनों ने जताई खुशी
केंद्र सरकार के इस फैसले का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है।
ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि यह लंबे समय से लंबित हजारों कर्मचारियों की बड़ी मांग थी। उन्होंने सरकार का आभार जताते हुए कहा कि मृतक आश्रित कोटे में नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को OPS का लाभ देने का आदेश ऐतिहासिक है।
हालांकि उन्होंने यह भी मांग की कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए गारंटीड पेंशन विकल्प भी उपलब्ध कराया जाए।
2023 के आदेश से कैसे अलग है यह फैसला?
केंद्र सरकार ने 3 मार्च 2023 को भी एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत उन कर्मचारियों को OPS चुनने का विकल्प दिया गया था जिन्होंने नौकरी के लिए आवेदन 1 जनवरी 2004 से पहले किया था लेकिन नियुक्ति बाद में मिली थी।
लेकिन उस आदेश में अनुकंपा आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया था। अब सरकार ने इस कमी को दूर करते हुए उन्हें भी OPS के दायरे में शामिल कर लिया है।
OPS की मांग क्यों उठ रही थी?
फरवरी 2026 में हुई नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की बैठक में अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों को OPS का लाभ देने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। कर्मचारी संगठनों ने इसे न्यायसंगत बताते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी।
इसके बाद सरकार ने मामले की समीक्षा कर यह फैसला लिया।
OPS और NPS में क्या है अंतर?
पुरानी पेंशन योजना (OPS)
- सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित मासिक पेंशन।
- अंतिम मूल वेतन (Basic Pay) का लगभग 50 प्रतिशत पेंशन।
- महंगाई राहत (DR) का लाभ।
- सरकार द्वारा पेंशन की पूरी जिम्मेदारी।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS)
- बाजार आधारित निवेश योजना।
- कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान।
- रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला लाभ बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर।
- पेंशन की राशि निश्चित नहीं होती।
क्या सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS वापस आएगी?
इस सवाल पर केंद्र सरकार का रुख फिलहाल स्पष्ट है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी संसद में कह चुके हैं कि केंद्र सरकार NPS या UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है।
हालांकि यह फैसला सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नहीं है, लेकिन अनुकंपा आधार पर नियुक्त हजारों कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत माना जा रहा है। 8वें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच आए इस निर्णय को कर्मचारी संगठनों की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है और इससे OPS की मांग को भी नई मजबूती मिली है।





