गौरा कन्या धन योजना मे इक्यावन हजार नही, 5100 ही मिलेंगे

बेटी बचाओ अभियान की पोल : गौरा कन्या धन योजना मे इक्यावन हजार नही, 5100 ही मिलेंगे
2017 में इन्टर पास बच्चियों के साथ सौतेला व्यवहार
51 हजार रुपए नहीं, केवल 5 हजार मिलेंगे
लालकुआं पूरे देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान जोर-शोर से चल रहा है मगर 2017 में इंटर पास की गई बच्चों को “कन्या गौरा धन योजना” का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्हें अब केवल ₹51000 के बदले केवल ₹5000 दिए जाएंगे, वह भी तब, जब वह दोबारा से अपने आवेदन फार्म 31 जुलाई तक जमा कर दें।
दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों
आखिर उनके साथ ऐसा दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों किया जा रहा है इसका जवाब किसी के पास नहीं है संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्य एवं अधिकारियों के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार द्वारा बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देने के मकसद से कन्या गौरा धन योजना शुरू की गई थी, जिसके तहत इंटर पास करने वाली बालिकाओं को ₹51000 प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाता था। इस कार्य के लिए सरकार ने समाज कल्याण विभाग को अधिकृत किया था मगर 2017 में इस कार्य को हस्तांतरित कर के बाल विकास विभाग को दे दिया गया। इसमें गौरा कन्या धन योजना के साथ-साथ नंदा कन्या धन योजना को भी शामिल कर “नंदा गौरा कन्या धन योजना” नाम दिया गया। जिसके तहत जन्म से लेकर इंटर पास करने तक विभिन्न चरणों में कुल मिलाकर ₹51000 दिए जाते थे। मगर इसमें फिर संशोधन कर दिया गया है।
इसके तहत विभिन्न चरणों की बजाए ₹51000 एकमुश्त दिए जाने का प्रावधान रखा गया है, लेकिन दुखद पहलू यह है कि इस योजना के लाभ से 2017 में पास हुई इंटर की छात्राओं को वंचित रखा गया है। आखिर उनका क्या कसूर था कि उन्हें इस योजना के लाभ से वंचित किया गया है !
इसका जवाब किसी के पास नहीं है इस संबंध में जीजीआईसी डोलिया हल्दुचौड़ की प्रधानाचार्य हेमलता का कहना है कि उनके पास किसी भी नए नियम की कोई जानकारी नहीं है।
जबकि बाल विकास परियोजना अधिकारी चंपा कोठारी का कहना है कि 2017 में पास हुई जिन बच्चियों को इस योजना का लाभ नहीं मिला है, वे 31 जुलाई तक अपने आवेदन बाल विकास परियोजना कार्यालय हल्द्वानी में जमा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें 51000 नहीं केवल ₹5000 दिए जाएंगे।”
केवल ₹5000 ही क्यों !
इस पर वह बोली कि उन्हें सिर्फ ऐसे ही आदेश मिले हैं। इस संबंध में डीपीओ अनुलेखा बिष्ट का कहना है कि जिन बच्चियों को 2017 का लाभ नहीं मिला है उन्हें केवल 31 जुलाई तक फार्म जमा करने की स्थिति में ₹5000 दिए जाएंगे।
अनुलेखा बिष्ट भी 2017 में इंटर पास -छात्राओं को योजना का लाभ नहीं मिलने का कारण नहीं बता सकीं ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि एक ओर जहां सरकार “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” का नारा देकर बच्चों के प्रोत्साहन की बात कर रही है, वहीं इस प्रकार का सौतेला व्यवहार कर मासूम बालिकाओं के साथ कुठाराघात क्यों कर रही है !
लिहाजा अब छात्राओं की और अभिभावकों की एकमात्र आशा की किरण अपने जनप्रतिनिधियों पर टिकी है कि क्या वे अधिकारों से वंचित हो रही बालिकाओं को इंसाफ दिला पाएंगे या फिर सब कुछ यूं ही समाप्त हो जाएगा  !

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