देहरादून, 10 जून। परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के महानिर्वाण दिवस पर बुधवार को श्री दरबार साहिब, देहरादून में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अनुपम संगम देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पूज्य गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके बताए सेवा, समर्पण और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर श्री दरबार साहिब के पूजनीय सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने श्री झण्डे जी पर विशेष पूजा-अर्चना कर विश्व शांति, मानव कल्याण, सुख-समृद्धि और सद्भावना की कामना की। साथ ही उन्होंने अपने पूज्य गुरु परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

देश-विदेश से पहुंची संगतों ने किया गुरु स्मरण
महानिर्वाण दिवस के अवसर पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री दरबार साहिब पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मत्था टेककर गुरु महाराज के श्रीचरणों में श्रद्धा व्यक्त की और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, गुरु भक्ति और सेवा भावना का दिव्य भाव देखने को मिला। इस दौरान संगतों के लिए लंगर, प्रसाद और शबील की विशेष व्यवस्था भी की गई।

सेवा दिवस के रूप में मनाया गया महानिर्वाण दिवस
परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के महानिर्वाण दिवस को “सेवा दिवस” के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर श्री दरबार साहिब परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
गुरु महाराज की स्मृति में आयोजित रक्तदान शिविर में कुल 101 यूनिट रक्तदान किया गया। संगतों ने इसे मानव सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताते हुए जरूरतमंदों की सहायता के लिए अपना योगदान दिया।
श्रद्धालुओं का कहना था कि “रक्तदान महादान” है और किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं हो सकता। गुरु महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में युवाओं और श्रद्धालुओं ने रक्तदान किया।

सेवा, प्रेम और मानवता का दिया था संदेश
श्रद्धालुओं ने कहा कि परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज ने अपने पूरे जीवनकाल में सेवा, परोपकार, प्रेम, करुणा और मानवता का संदेश दिया। महानिर्वाण दिवस केवल उनके स्मरण का अवसर नहीं बल्कि उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने और समाज सेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने का भी पर्व है।
उनकी प्रेरणा से संगतों ने इस दिन को श्रद्धा, सेवा और जनकल्याण के संकल्प के साथ मनाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान गुरु भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और मानव सेवा का अद्भुत वातावरण बना रहा।
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