एक्सक्लूसिव : मुख्यमंत्री की आयुष्मान योजना को पलीता लगाते अधिकारी

कुलदीप एस राणा

कोर्ट से लेकर जनता तक अटल आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा लगातार विवादों में घिरती जा रही है। अस्पतालों में फर्जी भुगतान हो या जरूरतमन्दों को योजना का लाभ न मिल पाना हो हर जगह योजना सवालों के घेरे में है।

लागू होने के 6 माह में ही बीमा योजना का हाईकोर्ट के कटघरे में आ जाना क्या संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े नही करता !

विगत 10 वर्षों में राज्य में यू हेल्थकार्ड व मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना दो योजनाओं के संचालन का हश्र सर्व विदित है। प्रतीत होता है कि उक्त योजनाओं के संचालन में रही खामियों से भी चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने कोई भी सबक नही लिया।

छः माह बीत जाने के बाद भी सूबे के राजकीय कर्मियों को उक्त बीमा योजना का लाभ दिए जाने की दिशा में कोई प्रगति होती नही दिख रही है।

देश दुनिया मे सरकारी बीमा योजनाओं के सफल संचालन का जिम्मा शासन  के साथ -साथ सम्बन्धित प्रबंधन में डिग्री-डिप्लोमा धारित प्रोफेशनल्स के जिम्मे होता है।यहां गौरतलब है कि उत्तराखंड में यह जिम्मा डॉक्टर्स व डेंटिस्ट के हवाले है। योजना के संचालन हेतु बनी कमेटी में नीति निर्धारक स्तर पर एक भी अधिकारी बीमा प्रबंधन से जुड़ा नही रखा गया है जो योजना की बारीकियों को समझता हो एवं उन्हें सुलझा सके। ऐसे में योजना की सफलता के मानक क्या होंगे यह स्वाथ्य सचिव नितेश झा ही बता सकते हैं।

एक तरफ तो नितेश झा योजना से जुड़े अस्पतालों व डॉक्टर्स के भ्रष्टाचार पर कार्यवही करते तो नज़र आ रहे हैं, लेकिन संचालन करने वाली कमेटी की खामियों की तरफ उनकी नज़र नही पड़ रही।  शायद यही कारण है योजना आज कोर्ट के कटघरे में खड़ी है।

योजना के संचालन से जुड़ी प्रमुख अधिकारी डॉ. सरोज नैथानी की पूर्व में भी एमएसबीवाई के संचालन में  प्रमुख भूमिका रही है।

एक सवाल यहाँ यह भी उठ रहा है कि जिस डॉ. सरोज नैथानी को स्वयं स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा संभालते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने रुद्रप्रयाग स्थानांतरित दिया था, क्या कारण थे कि उन्हें नौ माह में वापस निदेशालय लाकर अटल आयुष्मान का जिम्मा सौंप दिया गया? इन दिनों स्वास्थ्य निदेशालय की गलियों में यह चर्चा आम है कि बीमा योजनाओं के संचालन और धांधलियों पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच डॉ. सरोज नैथानी को सेफ एग्जिट देते हुए उन्हें हरिद्वार का मुख्य चिकित्साधिकारी बनाने की तैयारी चल रही है।

ऐसे में डॉक्टर्स एवम् अस्पतालों की सेटिंग गेटिंग के उक्त खेल में राज्य की जनता को स्वास्थ्य लाभ देने का मुख्यमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट कहीं लापरवाहियों की भेंट न चढ़ जाए !

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