ब्रेकिंग : कोटद्वार बार एसोसिएशन पर हड़ताल करने के लिए ₹25000/= का दण्ड

कमल जगाती, नैनीताल

उच्च न्यायालय नैनीताल ने कोटद्वार बार एसोसिएशन की हड़ताल और प्रस्ताव को अवैध बताते हुए याचिकाकर्ता अधिवक्ता कुलदीप अग्रवाल को पच्चीस हजार रुपये दण्ड स्वरूप देने को कहा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने बताया कि कोटद्वार जिला न्यायालय के अधिवक्ता सुशील रघुवंंशी की चार गोली मारकर वर्ष 2017 में हत्या कर दी गई थी। पहले अज्ञात के खिलाफ और फिर डाइंग डिक्लेरेशन(मृत्यु से पहले बयान)में नाम बताए जाने के बाद पत्नी रेखा रघुवंशी ने चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज करवाया था। एक वर्ष तक गिरफ्तारी नहीं होने पर रेखा ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी, जिसपर न्यायालय ने टीम गठित कर आरोपियों की गिरफ्तारी करने को कहा था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की बेल के लिए कोटद्वार के दो अधिवक्ता आगे आए थे, जिनका वहां की बार एसोसिएशन ने न केवल विरोध किया बल्कि बार की 16 मई 2019 की बैठक में प्रस्ताव(रेसोल्यूशन)लाकर किसी भी अधिवक्ता के पैरवी करने पर रोक लगा दी थी। इस प्रस्ताव के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
अधिवक्ता कुलदीप अग्रवाल ने जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार के साथ उत्तराखण्ड और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पार्टी बनाया। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने आज मामले में सुनवाई करते हुए कोटद्वार बार एसोसिएशन को ₹25,000/= याचिकाकर्ता को भुगतान करने को कहा है।

न्यायालय में जवाब देते हुए उत्तराखण्ड बार काउंसिल ने भी राज्य की सभी बार एसोसिएशन को उनकी जिम्मेदारी और शक्तियों के बारे में बताया। काउंसिल ने ये भी कहा है कि उनके पास इन एसोसिएशनों के खिलाफ कार्यवाही करने का अधिकार है। खण्डपीठ ने ए.डी.जे.कोटद्वार को भी निर्देशित किया है कि इसका विशेष ध्यान रखा जाए कि बार एसोसिएशन, न्यायालय के किसी भी कार्य को प्रभावित ना करे। ए.डी.जे.को निर्देश दिए गए हैं कि वो उच्च न्यायालय प्रशासन को किसी भी अनियमितता के दिखने पर सूचित करें। इसके साथ ही खण्डपीठ ने न्यायालय से भी आशा की है कि वो ए.डी.जे.के कार्यों की समीक्षा कर किसी भी न्यायिक असफलता के बारे में रिपोर्ट बनाकर जानकारी दें और आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करें।

खण्डपीठ ने पौड़ी के एस.एस.पी.को न्यायिक कार्यों को सुचारू रखने और कानून और न्याय व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कार्य करने के निर्देश भी दिए हैं । न्यायालय ने हड़ताल खत्म करने और हत्यारोपियों की पैरवी करने के लिए अधिवक्ताओं को कसाब और अपनी हत्या के बाद पैरवी मुहैय्या कराने का उदाहरण दिया।

 

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