खुलासा : जिला पंचायत में रिश्तेदारों को गुपचुप नियुक्ति

बागेश्वर में जिला पंचायत में नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ बवाल, काँग्रेस नेताओं और सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष पर लगाए, अपने रिश्तेदारों को गुपचुप तरीके से नियुक्ति देने के आरोप

• नियुक्तियों को रद्द करने और मामले की जांच करने की मांग, ऐसा नहीं होने की दशा में न्यायालय जाने की दी चेतावनी

• जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव ने आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित ठहराया और कहा कि किसी भी जांच का स्वागत है

जिला पंचायत बागेश्वर में आउटसोर्सिंग कंपनी पर्यावरण जनकल्याण समिति किच्छा उधमसिंह नगर माध्यम से 27 फरवरी 2020 को नियुक्त 3 कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर काँग्रेस पार्टी और और काँग्रेस से जुड़े जिला पंचायत सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती बसंती देव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उन्होने इन नियुक्तियों को पूर्ण रूप से अवैध ठहराते हुवे इन्हें रद्द करने, मामले की जांच करने की मांग की है और ऐसा नहीं होने की दशा में न्यायालय की शरण में जाने की चेतावनी दी है। उनका साफ आरोप है कि जिन तीन लोगों को नियुक्ति दी गयी है, उनमें एक, जिला पंचायत अध्यक्ष का देवर, एक भतीजा और एक भांजा है।

हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव का कहना है कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं और तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति नियमानुसार ही की गयी है और इसमें आउटसोर्स के सभी नियम- क़ानूनों का पूरी तरह से पालन किया गया है। पर्यटक आवास गृह बागेश्वर में आज पूर्व विधायक कपकोट ललित फर्शवाण, काँग्रेस नेता राजेन्द्र सिंह टंगड़ीया, जिला पंचायत सदस्य शामा हरीश ऐठानी, जिला पंचायत सदस्य आरे सुरेन्द्र सिंह खेतवाल और काँग्रेस नगर अध्यक्ष धीरज कोरंगा आदि ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव पर आरोप लगाया कि उन्होने नियम क़ानूनों को ताक में रखकर जिला पंचायत बागेश्वर में अपने तीन रिश्तेदारों की, आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्तियाँ की हैं।

उनका आरोप है कि उक्त नियुक्तियों से संबंधी कोई भी प्रस्ताव, जिला पंचायत के सदन में पारित नहीं किया गया है और ना ही इन नियुक्तियों में स्टाफिंग पैटर्न को माना गया है। ये तीनों ही नियुक्तियाँ अवैध है और इसकी जांच होनी चाहिये। ऐसा नहीं होने कि दशा में वो इस मामले को न्यायालय में ले जाएँगे। उनका कहना था कि 30 जनवरी 2020 को कर्मचारियों की नियुक्ति का पत्र पंचायतीराज विभाग उत्तराखण्ड को जाता है और 27 फरवरी 2020 को नियुक्तियाँ मिल जाती हैं, जिससे साफ होता है कि सुनियोजित तरीके से ये नियुक्तियाँ अंदरखाने की गयी हैं। उन्होने ये भी कहा कि तीनों कर्मचारी, जिला पंचायत अध्यक्ष के रिश्तेदार हैं। इस बात का वो शपथ पत्र भी दे सकते हैं। उन्होने साफ कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए और यदि ऐसा नहीं होता है तो वो न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य होंगे।

वहीं इस पूरे प्रकरण पर जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव भी अपने विपक्षियों पर हमलावर नजर आ रही है। उन पर लगाए जा रहे आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया लेने पर उनका कहना था कि उन पर लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद और पूरी तरह राजनीति से प्रेरित हैं और वो इस मामले में किसी भी प्रकार की जांच का स्वागत करती है। उन्होने कहा कि वो विपक्षियों के ऐसे राजनैतिक हथकंडों से विचलित होने वाली नहीं हैं और उनके स्तर से कोई नियुक्ति नहीं की गयी है। जिला पंचायत के रिक्त पदों पर जो भी नियुक्ति हुवी है। वो पंचायतीराज विभाग देहरादून द्वारा, नियमों के तहत ही की गयी है।

उनका कहना है कि इन तीनों कर्मचारियों में कोई भी उनका परिजन आदि नहीं है, ये बेबुनियाद आरोप है। अध्यक्ष बसंती देव का कहना है कि उनको हतोत्साहित करने के लिए सुनियोजित तरीके से ये सब वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वो पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियों – कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हैं और ऐसे राजनैतिक हथकंडों से घबराने वाली नहीं हैं। उन्होने कहा कि विपक्ष चाहे तो किसी भी तरह की जांच करा ले, वो तैयार हैं।

गौरतलब है कि विगत 27 फरवरी 2020 को जिला पंचायत बागेश्वर में तीन रिक्त पदों में तीन कर्मचारियों की आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से नियुक्ति की गयी। जिसमें कनिष्क अभियंता पद में जगथाना उडियार, कपकोट के हरीश सिंह, कनिष्क सहायक पद में दोबाड़ कर्मी, कपकोट के चतुर सिंह देव और कनिष्क सहायक पद पर ही कुँवारी कपकोट के श्याम सिंह को नियुक्ति प्रदान की गयी है। काँग्रेस नेताओं का आरोप है कि इनमें हरीश सिंह,जिला पंचायत अध्यक्ष का भांजा, चतुर सिंह देव, देवर और श्याम सिंह भतीजा है।

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